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Dhruv Jurel Debut: मां ने गिरवी रखी सोने की चैन, पिता ने झेली कारगिल वॉर, जानें ध्रुव जुरैल के सपनों की उड़ान भरने की कहानी

IND vs ENG Dhruv Jurel Debut: भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही 5 मैचों की टेस्ट सीरीज के तीसरे मैच में 4 खिलाड़ियों ने डेब्यू किया जिसमें एक नाम उत्तर प्रदेश के युवा विकेटकीपर ध्रुव जुरैल का भी रहा. हालांकि ध्रुव जुरैल के यहां तक पहुंचने में सपनों का सफर आसान नहीं था.

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Dhruv Jurel Debut: मां ने गिरवी रखी सोने की चैन, पिता ने झेली कारगिल वॉर, जानें ध्रुव जुरैल के सपनों की उड़ान भरने की कहानी

IND vs ENG Dhruv Jurel Debut: भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही टेस्ट सीरीज का तीसरा मैच राजकोट के मैदान पर खेला जा रहा है जहां पर धूप सेंटर विकेट को चमका रही थी और पूरा स्टेडियम एक युवा खिलाड़ी के डेब्यू का गवाह बनने को बेताब था. इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टेस्ट में उतरते हुए, ध्रुव जुरेल दुनिया के कई नामी बल्लेबाजों के बीच खड़े थे और सपनों की टेस्ट कैप उनके सीने पर टिकी थी.

राजकोट में इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टेस्ट में उम्मीद के मुताबिक, ध्रुव जुरेल ने टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया. विकेटकीपर-बल्लेबाज केएस भारत के प्रदर्शन से टीम मैनेजमेंट खुश नहीं था, इसलिए आगरा के इस 23 वर्षीय प्रतिभाशाली खिलाड़ी को सीरीज के इस महत्वपूर्ण मैच में मौका मिला. यह लम्हा न सिर्फ ध्रुव के लिए, बल्कि उनके पिता नेम सिंह के लिए भी एक सपने का पूरा होना था.

सिर्फ बेटे नहीं पिता के लिए भी फक्र का लम्हा

पहली बार अपने बेटे को भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए देखने पर उनके पिता नेम सिंह ने कहा,'ध्रुव ने आईपीएल में खेला, उसने भारत ए के लिए खेला, और अब उसे भारतीय टीम के लिए चुना गया है. यह हमारे लिए एक सपना है. हम नहीं जानते कि लोगों और भगवान का शुक्रिया कैसे अदा करें. मैंने भारतीय टीम से बुलावा आने के अगले दिन ही ध्रुव से बात की और उसे पहले से ज्यादा जमीन से जुड़ा रहने के लिए कहा.'

कारगिल युद्ध देख चुके पिता चाहते थे फौजी बने बेटा

नेम, भारतीय सेना के एक रिटायर्ड हवलदार हैं जो कि आज भी अपने दिल में कारगिल युद्ध के निशान लिए चलते हैं. उन्होंने हमेशा सपना देखा था कि उनका बेटा भी सेना की वर्दी पहने, देश की रक्षा करे लेकिन ध्रुव की राह अलग थी. बचपन से ही गली के क्रिकेट मैदानों में गूंजते बल्ले की आवाज ने उसे आकर्षित किया. क्रिकेट का जुनून धीरे-धीरे खून में रच गया और उसने देश की सेवा करने के लिए सेना की वर्दी की बजाय क्रिकेट बैट और मैदान को चुना.

नेम को याद आता है कि कैसे पड़ोसी और दोस्त ध्रुव की बल्लेबाजी की तारीफ करते थे, उसे क्रिकेट में आगे बढ़ाने की सलाह देते थे. पर एक पिता के रूप में चिंताएं भी थीं. क्रिकेट का भविष्य अनिश्चित, नौकरी की कोई गारंटी नहीं. पढ़ाई में भी ध्रुव औसत ही था. फिर भी, बेटे के जुनून को देख नेम पिघल गए. आगरा की स्प्रिंगडेल अकादमी के कोच परवेंद्र यादव से मुलाकात हुई, ध्रुव को तराशने की गुहार लगाई.

पैसों की तंगी से भी नहीं रुका सफऱ, मां ने बेची सोने की चैन

लेकिन क्रिकेट का रास्ता आसान नहीं था. पैसों की तंगी एक बड़ी बाधा थी. 800 रुपये का बल्ला खरीदने के लिए नेम को उधार लेना पड़ा. पहला किट बैग 6000 रुपये का था, जिसे खरीदने के लिए ध्रुव की माँ ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी इकलौती सोने की चेन गिरवी रख दी. यह प्यार, यह त्याग, ध्रुव को और मेहनत करने का जुनून देता था.

जुरेल के पिता ने शुरुआती संघर्ष को याद करते हुए कहा,' मुझे बैट लेने के लिए 800 रुपये उधार लेने पड़े थे क्योंकि तब हमारे पास पैसे नहीं थे. बाद में उसे एक किट बैग चाहिए था लेकिन वह बहुत महंगा था, लगभग 6000 रुपये का. मैंने कहा 'मत खेलो, इतना पैसा नहीं है लेकिन उसने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया और रोने लगा. उसे रोता देख उसकी मां ने अपनी इकलौती सोने की चेन गिरवी रखने का फैसला किया, इस तरह हम उसका पहला किट बैग खरीदने में कामयाब रहे. अब, जब मैं उन लम्हों को याद करता हूं तो कभी-कभी हंसता हूं, लेकिन एक बात साफ थी. वह कड़ी मेहनत करने के लिए तैयार था.'

ध्रुव के लिए पिता के पास क्या है सलाह

आज, जब ध्रुव टेस्ट कैप पहनकर मैदान में खड़े हैं, तो नेम की आँखें गर्व से छलक रही हैं. बेटे के हर रन को वह अपने दिल में गिनते हैं. लेकिन इस खुशी के साथ एक सलाह भी जुड़ी है.

उन्होंने बेटे की सलाह पर बात करते हुए कहा, 'हम अब उससे क्रिकेट के बारे में बात नहीं करते. अब बातचीत खाने-पीने और संस्कारों की होती है. मैं उसे यही सलाह देता हूं कि बेटा उन लोगों का सम्मान करना मत भूलना जिन्होंने तुम्हारा हाथ थामा है.'

युवाओं को प्रेरित करती है ध्रुव की कहानी

ध्रुव की कहानी सपनों की है, जुनून की है. यह हजारों युवाओं को सीख देती है कि जुनून के पीछे भागो, मेहनत करो, तो मंजिल खुद सामने आती है. और जब सपने पूरे होते हैं, तो उनमें माँ-बाप के त्याग की खुशबू भी शामिल होती है. ध्रुव की पारी अभी शुरू हुई है, देखना बाकी है कि ये युवा क्रिकेटर कितने रन बनाता है, कितने दिल जीतता है.