नई दिल्ली: अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने के बाद यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं रह गया है. इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में वेनेजुएला का विशाल तेल भंडार है. अमेरिका खुद दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल उत्पादक है, फिर भी वेनेजुएला के तेल में उसकी दिलचस्पी बनी रहती है. इसकी वजह तेल की मात्रा नहीं, बल्कि उसका प्रकार और वैश्विक जरूरतें हैं.
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित कच्चे तेल का भंडार है. लेकिन यह सिर्फ संख्या का खेल नहीं है. वैश्विक ऊर्जा राजनीति में तेल की किस्म और रिफाइनिंग क्षमता भी उतनी ही अहम होती है. अमेरिका और अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अपने रणनीतिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए ऐसे देशों पर नजर रखती हैं, जहां ऊर्जा संसाधन लंबे समय तक सप्लाई सुनिश्चित कर सकते हैं. वेनेजुएला इसी वजह से हमेशा चर्चा में रहता है.
कच्चे तेल को मुख्य रूप से दो पैमानों पर बांटा जाता है. पहला API ग्रेविटी, जिससे पता चलता है कि तेल हल्का है या भारी. दूसरा सल्फर की मात्रा, जिससे यह तय होता है कि तेल स्वीट है या सॉर. लाइट क्रूड जल्दी रिफाइन होता है और पेट्रोल ज्यादा देता है. मीडियम क्रूड संतुलित होता है. जबकि हैवी क्रूड गाढ़ा होता है और इससे डीजल व फ्यूल ऑयल ज्यादा निकलता है.
वेनेजुएला के ओरिनोको बेल्ट में पाया जाने वाला तेल एक्स्ट्रा हैवी क्रूड की श्रेणी में आता है. इसकी API ग्रेविटी कई जगह 10 से भी कम है. यह इतना गाढ़ा होता है कि इसे जमीन से निकालना और प्रोसेस करना महंगा पड़ता है. इसके बावजूद वेनेजुएला के पास करीब 303 बिलियन बैरल का प्रमाणित तेल भंडार है, जो दशकों तक वैश्विक सप्लाई को सहारा दे सकता है.
आज की स्थिति में हैवी क्रूड केवल वेनेजुएला तक सीमित नहीं है. कनाडा के ऑयल सैंड्स, मेक्सिको का माया क्रूड, सऊदी अरब के कुछ ग्रेड और इराक व रूस के मिश्रित ग्रेड भी बाजार में मौजूद हैं. फिर भी वेनेजुएला की खासियत यह है कि उसके भंडार की मात्रा सबसे अधिक है. सही निवेश और तकनीक मिलने पर वह रोजाना तीन मिलियन बैरल से ज्यादा उत्पादन कर सकता है.
वेनेजुएला की सबसे बड़ी समस्या कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी कमी है. सरकारी तेल कंपनी PDVSA में वर्षों से निवेश नहीं हुआ. मेंटेनेंस की कमी से उत्पादन गिरता चला गया. इसके अलावा अमेरिका द्वारा 2019 से लगाए गए प्रतिबंधों ने टेक्नोलॉजी, फाइनेंस और स्पेयर पार्ट्स की सप्लाई रोक दी. राजनीतिक अस्थिरता और पुराने राष्ट्रीयकरण फैसलों ने विदेशी कंपनियों को भी दूर कर दिया.
अमेरिका के पास भले ही लाइट क्रूड की भरमार हो, लेकिन उसकी कई रिफाइनरियां हैवी क्रूड के हिसाब से डिजाइन की गई हैं. ऐसे में वेनेजुएला जैसे देश का तेल पूरी तरह नजरअंदाज करना आसान नहीं है. यही वजह है कि मादुरो सरकार पर कार्रवाई को केवल राजनीति नहीं, बल्कि ऊर्जा रणनीति के नजरिये से भी देखा जा रहा है.