नई दिल्ली: दुनिया में एक बार फिर बदलाव का संकेत दिख रहा है. राजधानी काराकस में अमेरिका ने शनिवार सुबह तड़के तेज धमाकों के साथ हमला कर दिया. इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि इस ऑपरेशन में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनके परिवार को पकड़ लिया गया है. ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी सेना की सबसे घातक यूनिट 'डेल्टा फोर्स' ने राजधानी काराकास सहित कई इलाकों में हमले के बाद मादुरो को उनके देश से बाहर निकाल लिया.
इस हमले के बाद वेनेजुएला में हड़कंप मचा है. देश की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने एक बयान जारी कर कहा कि उन्हें राष्ट्रपति और उनकी पत्नी की स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पुष्टि की मांग की है कि क्या वे दोनों सुरक्षित हैं. वहीं, ट्रंप ने इस मिशन को शानदार बताते हुए अपनी सेना की बहादुरी की तारीफ की है.
अमेरिका की इस एंटी-टेरर यूनिट का आधिकारिक नाम फर्स्ट स्पेशल फोर्सेज ऑपरेशनल डिटैचमेंट-डेल्टा (1st SFOD-D) है. यह दुनिया की सबसे गुप्त और खतरनाक मिलिट्री यूनिट्स में से एक मानी जाती है. इस यूनिट ने कई ऑपरेशन को अंजाम दिया है. यह दुनिया की सबसे ज्यादा खुफिया एजेंसियों में से एक है.
यह यूनिट जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (JSOC) के तहत आती है और केवल 'हाई-वैल्यू टारगेट' पर काम करती है. इसकी स्थापना 1970 के दशक में ब्रिटिश SAS की तर्ज पर की गई थी. बता दें कि बगदादी और सद्दाम को भी इसी ने दबोचा था. इस यूनिट को बनाने का मकसद अमेरिकी सेना को एक समर्पित आतंकवाद विरोधी फोर्स देना था.
डेल्टा फोर्स का ट्रैक रिकॉर्ड चौंकाने वाला है. इसी यूनिट ने इराक के पूर्व तानाशाह सद्दाम हुसैन को जमीन के नीचे बने गड्ढे से खोज निकाला था. 2019 में आईएसआईएस (ISIS) सरगना अबू बक्र अल-बगदादी को खत्म करने के मिशन 'कायला मूर' को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था.