नई दिल्ली: कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन यानी अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस हाउस के सेक्रेटरी जनरल को दिया है. कांग्रेस MP गौरव गोगोई ने कहा कि नोटिस दोपहर 1:14 बजे रूल्स ऑफ प्रोसीजर एंड कंडक्ट ऑफ बिजनेस के रूल 94C के तहत पेश किया गया था.
प्रस्ताव पर करीब 119 MPs के साइन हैं. कांग्रेस नेताओं ने कहा कि ये आंकड़े विपक्ष के बड़े सपोर्ट को दिखाते हैं और सेशन के दौरान कथित भेदभाव, बोलने का समय न देने और रुकावटों पर बढ़ती चिंता को दिखाते हैं. यह कदम बजट सेशन के दौरान विपक्ष और ट्रेजरी बेंच के बीच चल रहे टकराव में बढ़त दिखाता है.
कांग्रेस MP मणिकम टैगोर ने मंगलवार को कहा कि विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस नोटिस दिया है, और इसे असाधारण हालात में उठाया गया असाधारण कदम बताया.
The Opposition has placed its faith in constitutional propriety.
While holding the Hon’ble Speaker in personal regard, we are pained and anguished by the consistent denial of opportunities to Opposition MPs to raise issues of public importance.
After many years, a no-confidence… pic.twitter.com/DwGElhoZYM— Manickam Tagore .B🇮🇳மாணிக்கம் தாகூர்.ப (@manickamtagore) February 10, 2026Also Read
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X पर एक पोस्ट में, टैगोर ने कहा कि विपक्ष संवैधानिक मर्यादा में अपना भरोसा बनाए रखता है और स्पीकर के लिए पर्सनल सम्मान बनाए रखता है. हालांकि, उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि विपक्षी MPs को सदन में सार्वजनिक महत्व के मुद्दे उठाने का मौका लगातार नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस नोटिस लाने का कदम सालों से ऐसी शिकायतों के बाद आया है, जो विपक्ष की चिंताओं की गंभीरता को दिखाता है.
इससे पहले, प्रियंका गांधी सहित कांग्रेस की छह महिला सांसदों के एक ग्रुप ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक कड़ा पत्र लिखकर उन पर 'झूठे और मानहानिकारक आरोप' लगाने का आरोप लगाया है. यह विवाद तब शुरू हुआ जब बिरला ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को सदन में न आने की सलाह दी थी क्योंकि उन्हें डर था कि कांग्रेस सांसद पीएम की सीट के पास कोई 'अनुचित घटना' कर सकते हैं.
बिरला को लिखे तीन पन्नों के पत्र में, कांग्रेस सांसद एस. जोतिमणि और अन्य महिला सांसदों ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया और इसे सरकार द्वारा विपक्ष के नेता को बोलने की अनुमति न देने के मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया.