कोलकाता: पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने ममता दीदी की सरकार को चारों खाने चित कर दिया है. बीजेपी ने राज्य में प्रचंड बहुमत हासिल कर इतिहास रच दिया है. इस जीते के पीछे चहां राष्ट्रीय नेतृत्व की रणनीति रही तो वहीं राजस्थान के नेताओं की सक्रिया भूमिका भा अब चर्चाओं का विषय बन गई है.
खासकर ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर में राजेंद्र राठौड़ की मौजूदगी ने सबका ध्यान खींचा है. पूरे चुनाव के दौरान उत्तर बंगाल से लेकर राजधानी कोलकाता तक राजस्थान के नेताओं ने जबरदस्त मेहनत की. इसी जमीनी स्तर की मौजूदगी ने पश्चिम बंगाल में चुनावी समीकरण बदलने में अहम भूमिका निभाई है.
बंगाल विजय में जितना योगदान राष्ट्रीय नेताओं का है, राजस्थान के नेताओं की भूमिका भी उनसे कम नहीं है. राजस्थान के नेताओं ने जीत में अहम और निर्णायक योगदान दिया है. पार्टी लीडरशिप द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियों को इन नेताओं ने पूरी रणनीति के साथ जमीन पर उतारा है. बंगाल में चुनावी अभियान को सही तरीके से आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल को अहम जिम्मेदारियां दी गईं थी. इसका सीधा असर नेताओं में देखने को मिला भी, जहां बीजेपी ने कई क्षेत्रों में उम्मीद से ज्यादा बेहतर प्रदर्शन किया.
सबसे अहम ममता बनर्जी के चुनावी क्षेत्र भवानीपुर में राजेंद्र राठौर की भूमिका की खासी चर्चा हो रही है. उनकी लीडरशिप में कई वार्डों में आक्रामक अभियान चलाया गया. इसके साथ ही स्थानीय लोगों के साथ मजबूत पकड़ बनाने और मतदाताओं से सीधा संवाद स्थापित करने के कारण बिजेपी उम्मीदवार को बढ़त दिलाने में मदद मिली. इन्हीं सभी वजहों से इस सीट पर पहले से बेहतर प्रदर्शन पार्टी का रहा.
उत्तर बंगाल में सिलीगड़ी. दाजिलिंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार और कूच बिहार जैसे जिलों में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया, इन 28 सीटों में से 27 पर बीजेपी ने जीत दर्ज की है. यहां केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत और कैलाश चौधरी ने लंबे समय तक अभियान चलाया था. लगातार सभाओं और लोगों से सीधे संपर्क ने पार्टी को मजबूत किया, जिसका फल पार्टी को नतीजों में मिला.
वहीं कोलकाता नॉर्थ और साउथ जैसे इलाकों में बीजेपी ने खुद को खासा मजबूत किया है. कोलकाता उत्तर की 7 में से 4 सीटों पर पहली बार बीजेपी ने अपनी जीत दर्ज की है. वहीं आसनसोल में पार्टी ने सभी सात सीटों पर जीत हासिल की है. इन क्षेत्रों में राजस्थान के कई नेताओं ने मैनेजमेंट की जिम्मेदारी संभाली थी. इन्हीं नेताओं के जमीनी प्रयासों और काम से बीजेपी को विजय मिली है.