Israel warns Hamas: संयम और उम्मीद के बीच चल रही जिस प्रक्रिया को दुनिया युद्धविराम कह रही थी, उसी के बीच एक और विवाद उभर आया है. हमास द्वारा लौटाए गए शवों में से एक का मिलान बंधकों से न होना इजराइल के लिए मानवीय और राजनीतिक संकट बन गया है.
कूटनीतिक मध्यस्थता के बावजूद दोनों पक्षों के बीच अविश्वास गहरा गया है और नेताओं की तीखी भाषाएं समझौते को और अस्थिर कर रही हैं.
सोमवार को हमास ने चार लाशें और 20 जिन्दा बंधक लौटाए थे, उसके अगले दिन फिर चार और शव सौंपे गए. इजराइली फॉरेंसिक जांच के बाद सेना ने कहा कि मंगलवार को लौटाई गई चार लाशों में से एक किसी भी ज्ञात बंधक से मेल नहीं खाती. यह खुलासा परिवारों के दर्द और गुस्से को और बढ़ा देता है क्योंकि कुल 28 मृत बंधकों के शवों की प्रतीक्षा जारी है. इजराइली अधिकारियों ने हमास से कहा है कि वह सौंपे गए शवों की जिम्मेदारी उठाए और शेष शव तुरंत लौटाए जाएं.
इजराइली प्रधानमंत्री ने भी हमास पर दबाव बना कर समझौते की शर्तें पूरी कराने की मांग दोहराई. नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर इतमार बेन ग्वीर ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि 'बहुत हो गई बेइज्जती' और हमास को सख्त संदेश दिया कि इसकी हरकतों का खामियाजा भुगतना होगा. उनके कड़े शब्दों ने फिलहाल समर्पित कूटनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं और स्थिति को और विरक्त कर दिया है.
जहां एक ओर इजराइल ने करीब 2,000 फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई की, वहीं बंधक परिवारों का दर्द कम नहीं हुआ. जिन 20 जीवित बंधकों की रिहाई हुई, उनकी वापसी पर भी खुशी के साथ गहरी पीड़ा मिली- क्योंकि मृत बंधकों के शरीरों की सीमित रिलीज ने सवाल खड़े किए हैं. परिजनों का कहना है कि इंसानी संवेदना के नाम पर किए गए वायदों का पालन होना चाहिए, गलत या मिलान न होने वाली लाशों ने भरोसे को तोड़ दिया है.
वर्तमान हालात में युद्धविराम का भविष्य अनिश्चित दिखता है. दोनों ओर से सख्त टिप्पणियां और आरोप-प्रत्यारोप आगे की वार्ता और विश्वास बहाली को कठिन बना रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता और दबाव के बावजूद यदि शवों की वापसी और बचे बंधकों का सवाल जल्द सुलझा नहीं, तो मानवीय संकट के साथ-साथ रणनीतिक और राजनीतिक परिणाम भी गम्भीर होंगे. नया मसला यह है कि क्या कूटनीति इस भावुक और संवेदनशील मुद्दे को तनाव के भंवर से निकाल पाएगी या तीखे बयानों ने समझौते की दीवार कमजोर कर दी है.