नई दिल्ली: संसद में राहुल गांधी के भाषण के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है. उन्होंने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम कुख्यात सेक्स अपराधी जेफरी एपस्टीन की फाइल्स से जोड़ा. इसके जवाब में पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन आरोपों को बेबुनियाद बताया. उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी मुलाकातें अंतरराष्ट्रीय शांति संस्थान के एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में हुई थीं और उनका एपस्टीन के अपराधों से कोई लेना-देना नहीं है.
हरदीप सिंह पुरी ने राहुल गांधी के आरोपों को बकवास करार देते हुए कहा कि वे एपस्टीन से केवल तीन या चार बार मिले थे. यह मुलाकातें तब हुई थीं जब वे अंतरराष्ट्रीय शांति संस्थान (IPI) के कमीशन का हिस्सा थे. पुरी ने स्पष्ट किया कि उनके बॉस टेर्जे रॉड-लार्सन एपस्टीन को जानते थे और उन्होंने ही पुरी का परिचय कराया था. उन्होंने कहा कि इन मुलाकातों का एपस्टीन पर लगे किसी भी आपराधिक मामले से कोई संबंध नहीं है.
मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अमेरिकी न्याय विभाग ने इस मामले से जुड़े 30 लाख से अधिक दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं. पुरी ने कहा कि 2009 से 2017 के बीच, जब वे संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत थे, इन दस्तावेजों में उनकी मुलाकातों के केवल कुछ ही संदर्भ हैं. उन्होंने कहा कि उनकी सारी बातचीत पूरी तरह पेशेवर थी और अंतरराष्ट्रीय बहुपक्षवाद जैसे महत्वपूर्ण कार्यों से जुड़ी थी. पुरी के अनुसार राहुल गांधी को ईमेल ध्यान से पढ़ने चाहिए.
पुरी ने राहुल गांधी को सलाह दी कि उन्हें एपस्टीन फाइल्स की वास्तविक प्रकृति को समझना चाहिए. उन्होंने कहा कि ये फाइलें बाल यौन शोषण और अन्य जघन्य अपराधों के बारे में हैं, जिनमें पीड़ितों ने सत्ताधारी लोगों के खिलाफ मामले दर्ज कराए हैं. पुरी ने जोर देकर कहा कि उनका नाम किसी गलत काम के लिए नहीं, बल्कि केवल पेशेवर मुलाकातों के संदर्भ में आया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे एपस्टीन की निजी गतिविधियों में कभी शामिल नहीं रहे.
मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ पुराने ईमेल भी पढ़कर सुनाए. एक ईमेल में वे लिंक्डइन के पूर्व बॉस रीड हॉफमैन को भारत में इंटरनेट आधारित आर्थिक गतिविधियों की संभावनाओं के बारे में बता रहे थे. पुरी ने बताया कि एपस्टीन उन्हें 'दोगुला' कहता था क्योंकि उसकी गतिविधियों में पुरी की कोई दिलचस्पी नहीं थी. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को इन तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने के बजाय पूरी जानकारी पढ़नी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके.
दरअसल, राहुल गांधी ने लोकसभा में दावा किया था कि पुरी का नाम उन फाइल्स में है जिनमें डोनाल्ड ट्रंप और बिल क्लिंटन जैसे बड़े नेताओं के नाम शामिल हैं. पुरी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे केवल राजनीतिक द्वेष बताया. एपस्टीन की मौत 2019 में न्यूयॉर्क की जेल में हो चुकी है और उसके बाद से ये फाइलें वैश्विक चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं. पुरी ने साफ किया कि पेशेवर मुलाकातों को अपराध से जोड़ना अनैतिक और भ्रामक है.