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'मैं बच गया क्योंकि...', असम के प्रोफेसर ने बताई पहलगाम आतंकी हमले की खौफनाक आपबीती

हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा के छद्म समूह रेसिस्टेंस फ्रंट ने ली है. इस खौफनाक घटना में असम विश्वविद्यालय के बंगाली विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर देबाशीष भट्टाचार्य भी फंस गए थे, जिन्होंने अपनी आपबीती बयां की.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
'मैं बच गया क्योंकि...', असम के प्रोफेसर ने बताई पहलगाम आतंकी हमले की खौफनाक आपबीती

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार सुबह बैसारन मीडोज में हुए आतंकी हमले ने देश को स्तब्ध कर दिया. इस हमले में 28 पर्यटकों की जान चली गई, जिनमें दो विदेशी (यूएई और नेपाल) और दो स्थानीय लोग शामिल थे. हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा के छद्म समूह रेसिस्टेंस फ्रंट ने ली है. इस खौफनाक घटना में असम विश्वविद्यालय के बंगाली विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर देबाशीष भट्टाचार्य भी फंस गए थे, जिन्होंने अपनी आपबीती बयां की.

प्रोफेसर की दिल दहलाने वाली कहानी
देबाशीष भट्टाचार्य ने न्यूज18 असम को बताया, "मैं अपने परिवार के साथ एक पेड़ के नीचे सो रहा था, तभी मुझे आसपास लोगों के कलमा पढ़ने की आवाजें सुनाई दीं. मैंने भी सहज रूप से कलमा पढ़ना शुरू कर दिया. कुछ ही पलों बाद, छलावरण वर्दी में एक आतंकी हमारी ओर आया और मेरे बगल में लेटे व्यक्ति को गोली मार दी." आतंकी ने फिर भट्टाचार्य की ओर देखा और पूछा, "क्या कर रहे हो?" उन्होंने और जोर से कलमा पढ़ा. "मुझे नहीं पता क्यों, लेकिन वह मुड़कर चला गया."

मौका पाकर भट्टाचार्य अपनी पत्नी और बेटे के साथ वहां से भागे. "हम पहाड़ी पर चढ़े, एक बाड़ पार की और घोड़ों के निशानों का पीछा करते हुए करीब दो घंटे चले. आखिरकार, एक घुड़सवार मिला, जिसकी मदद से हम होटल पहुंचे." वे बोले, "मुझे अभी भी यकीन नहीं कि मैं जिंदा हूं."

सुरक्षा बलों की कार्रवाई
हमले के बाद भारतीय सेना के चिनार कोर ने तलाशी अभियान शुरू किया. सेना ने कहा, "खोज अभियान जारी है, और हमलावरों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं." जम्मू-कश्मीर हाई अलर्ट पर है.

हमले की क्रूर रणनीति
प्रारंभिक जांच के अनुसार, तीन आतंकियों ने पीड़ितों को लिंग के आधार पर अलग किया, उनकी पहचान जांची, और फिर स्नाइपर जैसी रणनीति से गोलीबारी की. कई लोग रक्तस्राव के कारण मरे. स्थान को जानबूझकर ऐसा चुना गया ताकि बचाव में देरी हो.