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उत्तराखंड के नानकमत्ता में बड़ी कार्रवाई, हिस्ट्रीशीटर का अवैध भवन बुलडोजर से ध्वस्त

नानकमत्ता में प्रशासन और पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हिस्ट्रीशीटर तारा सिंह से जुड़े अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
उत्तराखंड के नानकमत्ता में बड़ी कार्रवाई, हिस्ट्रीशीटर का अवैध भवन बुलडोजर से ध्वस्त
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उत्तराखंड के नानकमत्ता में प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर सरकारी भूमि पर बने एक अवैध भवन को बुलडोजर से हटाया. यह कार्रवाई हिस्ट्रीशीटर तारा सिंह और उसके परिवार से जुड़े मामलों की जांच के बाद की गई. प्रशासन ने इसे नशे और अपराध के खिलाफ सख्त संदेश बताया है.

सरकारी जमीन पर चला बुलडोजर

शनिवार तड़के नानकमत्ता में प्रशासन और पुलिस की टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए सिंचाई विभाग की भूमि पर बने एक अवैध भवन को ध्वस्त कर दिया. अधिकारियों के अनुसार यह निर्माण बिना अनुमति के किया गया था. जांच के दौरान सामने आया कि इस भवन का उपयोग संदिग्ध गतिविधियों और नशे के कारोबार से जुड़ी गतिविधियों के लिए किया जाता था. कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे. स्थानीय प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसे मामलों पर सख्ती जारी रहेगी.

तारा सिंह और परिवार का लंबा आपराधिक रिकॉर्ड

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार तारा सिंह नानकमत्ता थाने का हिस्ट्रीशीटर है और उसके खिलाफ वर्षों से कई गंभीर मामले दर्ज हैं. इनमें लूट, डकैती, गैंगस्टर एक्ट, एनडीपीएस एक्ट, आबकारी अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और हत्या के प्रयास जैसे मामले शामिल हैं. जांच में यह भी सामने आया कि उसके परिवार के अन्य सदस्य भी अलग-अलग मामलों में नामजद रहे हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे परिवार की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है. इसी आधार पर संबंधित विभागों को रिपोर्ट भेजी गई थी, जिसके बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई.

अपराध और नशे के खिलाफ सख्त संदेश

पुलिस और प्रशासन ने इस कार्रवाई को अपराधियों के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश बताया है. अधिकारियों का कहना है कि राज्य में नशे के कारोबार और संगठित अपराध के खिलाफ अभियान लगातार चलाया जा रहा है. एसएसपी के निर्देश पर ऐसे लोगों की संपत्तियों और गतिविधियों की भी जांच की जा रही है, जो अवैध कामों में शामिल पाए जाते हैं. प्रशासन का मानना है कि कानून का पालन कराने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं.