रामपुर: उत्तर प्रदेश के रामपुर में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट माने जाने वाले जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में है. मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को आयकर विभाग ने नोटिस जारी किया है. नोटिस में चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में ट्रस्ट को मिली आयकर छूट को निरस्त करने के संबंध में जवाब मांगा गया है. इस कार्रवाई के बाद ट्रस्ट की गतिविधियों और उसके संचालन को लेकर बहस तेज हो गई है.
मामले में शिकायतकर्ता और भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि जौहर ट्रस्ट का गठन चैरिटी और सामाजिक कार्यों के उद्देश्य से किया गया था, लेकिन व्यवहार में इसका संचालन एक पारिवारिक संस्था की तरह किया गया. उन्होंने दावा किया कि ट्रस्ट के अधिकांश सदस्य आजम खान के परिवार से जुड़े हुए हैं, जिनमें उनकी पत्नी, बेटे और अन्य रिश्तेदार शामिल हैं.
मुकदमो के अलावा अब आजम खान के ट्रस्ट पर भी संकट है,मौलाना जौहर ट्रस्ट से ही वे रामपुर में यूनिवर्सिटी भी चलाते हैं,अब इनकम टैक्स विभाग ने ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन मे गड़बड़ियों को लेकर नोटिस जारी कर दिया है,#inkamtex #Azamkhan #Azamkhanrampur #Jouharaliyouniversity #Rampur #Yogi pic.twitter.com/aYGB3ak7Xz
— SureshRampur (@Sureshrampurn) June 21, 2026
आकाश सक्सेना ने कहा कि इस मामले को लेकर पहले भी कई शिकायतें की गई थीं और आयकर विभाग की ओर से कई बार नोटिस जारी किए गए थे. उनका आरोप है कि इन नोटिसों का उचित जवाब नहीं दिया गया. उन्होंने जौहर यूनिवर्सिटी को प्रदेश के सबसे बड़े कथित घोटालों में से एक बताया और कहा कि इसकी विस्तृत जांच की जानी चाहिए.
शिकायतकर्ता के अनुसार जौहर यूनिवर्सिटी के लिए सरकारी संसाधनों का उपयोग किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के नाम पर सरकारी जमीन और सरकारी धन का इस्तेमाल किया गया. सक्सेना का दावा है कि यूनिवर्सिटी लगभग 560 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है, जिसमें 350 एकड़ से अधिक भूमि सरकारी है. उन्होंने कहा कि इस संबंध में अदालत में भी तथ्यों को प्रस्तुत किया जा चुका है.
इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी की कई इमारतों का निर्माण सरकारी धन से किया गया. उनका कहना है कि पूर्व में आयकर विभाग की एक रिपोर्ट में भी इस प्रकार के निष्कर्षों का उल्लेख किया गया था. हालांकि इन आरोपों पर ट्रस्ट या आजम खान की ओर से ताजा प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
मामले में यूनिवर्सिटी परिसर में बनी मस्जिद को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. आकाश सक्सेना ने कहा कि शिक्षा संस्थान का उद्देश्य शिक्षा प्रदान करना होता है और यदि परिसर में धार्मिक ढांचे बनाए जाते हैं तो सभी समुदायों के लिए समान व्यवस्था होनी चाहिए. उन्होंने इस मुद्दे पर भी जांच की मांग की है.