चंडीगढ़: उच्च शिक्षा से जुड़े प्रस्तावित विकसित भारत शिक्षा अधिनियम बिल, 2025 को लेकर पंजाब सरकार ने अपनी चिंता जाहिर की है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार से इस विधेयक पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया है. उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर कहा कि इस तरह के बड़े बदलावों से पहले सभी पक्षों के साथ व्यापक चर्चा जरूरी है. मुख्यमंत्री का मानना है कि प्रस्तावित कानून का असर छात्रों, शिक्षण संस्थानों और राज्यों की शैक्षिक नीतियों पर पड़ सकता है.
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि प्रस्तावित कानून के कुछ प्रावधान ऐसे हैं, जिनका सीधा प्रभाव उच्च शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है. उन्होंने आशंका जताई कि यदि यह विधेयक वर्तमान स्वरूप में लागू हुआ तो शिक्षा की लागत बढ़ सकती है, जिससे आम और मध्यम वर्गीय परिवारों के छात्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है.
मान ने अपने पत्र में कहा कि शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करना सरकारों की प्राथमिक जिम्मेदारी है. उन्होंने चिंता व्यक्त की कि शिक्षा महंगी होने की स्थिति में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के अवसर सीमित हो सकते हैं. इससे सामाजिक और शैक्षिक असमानता बढ़ने की आशंका भी पैदा हो सकती है.
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शिक्षा से जुड़ी स्थानीय जरूरतें अलग-अलग राज्यों में भिन्न होती हैं. ऐसे में किसी भी नए कानून को लागू करते समय राज्यों की भूमिका और अधिकारों को ध्यान में रखना जरूरी है. उनका मानना है कि प्रस्तावित प्रावधान राज्यों की निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं.
भगवंत मान ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि शिक्षा क्षेत्र में इतने बड़े बदलाव से पहले विशेषज्ञों, शिक्षण संस्थानों, राज्यों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत चर्चा की जाए. उन्होंने कहा कि संवाद और सहमति के आधार पर लिए गए फैसले अधिक प्रभावी और व्यावहारिक साबित होते हैं.
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र के माध्यम से केंद्र सरकार से विधेयक के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करने की अपील की. उन्होंने कहा कि छात्रों और शिक्षा व्यवस्था के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सभी चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए.