चंडीगढ़ का 75 साल पुराना मास्टर प्लान अब लोगों की बदलती जरूरतों के हिसाब से अपडेट किया जा रहा है. इन बदलावों को अंतिम मंजूरी देने से पहले प्रशासन ने एक स्क्रीनिंग कमेटी बनाई है, जो सेक्टर-6 स्थित यूटी गेस्ट हाउस में लोगों की आपत्तियां और सुझाव सुनेगी. यह पूरी प्रक्रिया चार दिनों तक चलेगी.
प्रशासन ने अलग-अलग विषयों के लिए अलग-अलग दिन तय किए हैं, ताकि किसी को परेशानी न हो. 25 जून को आवासीय और कॉमर्शियल मामलों पर बात होगी. वहीं 26 जून को इंडस्ट्रियल और सार्वजनिक क्षेत्रों से जुड़े सुझावों पर चर्चा होगी. इसके बाद 27 जून को पेरिफेरी इलाकों से जुड़े आवेदनों की सुनवाई रखी गई है. जो लोग अपने तय दिन पर नहीं पहुंच पाएंगे, उन्हें 28 जून को आखिरी मौका दिया जाएगा. हर दिन सुनवाई सुबह साढ़े दस बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक और फिर दोपहर तीन बजे से शाम पांच बजे तक चलेगी.
मास्टर प्लान में बदलाव को लेकर अब तक सौ से ज्यादा सुझाव प्रशासन के पास पहुंच चुके हैं. हेरिटेज विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों ने इमारतों की ऊंचाई तीस मीटर तक बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध किया है. वहीं रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि सीवरेज, पानी और स्कूलों की क्षमता बढ़ाए बिना आबादी का दबाव बढ़ाना सही नहीं होगा. लोगों ने पार्किंग और आग सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है. वहीं व्यापारिक संगठनों ने इंडस्ट्रियल प्लॉट और मिक्स्ड लैंड यूज बढ़ाने के फैसले का स्वागत किया है.
सुनवाई की प्रक्रिया के बीच स्थानीय सांसद मनीष तिवारी ने भी कुछ अहम सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए दी गई इक्कीस दिन की समय सीमा बहुत कम है. उनका मानना है कि इतने बड़े और दूरगामी असर वाले प्रस्तावों पर ठीक से चर्चा और समीक्षा करने के लिए लोगों को ज्यादा समय मिलना चाहिए.