मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला पर इंदौर हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है. भोजशाला-कमल मौला परिसर पर लंबे समय से चल रहे इस विवाद पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने इसे मंदिर घोषित किया और हिंदुओं को पूजा के अधिकार को बरकरार रखा है.
अदालत ने इस मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि पुरातत्व एक विज्ञान है और इस पर आधारित निष्कर्षों पर भरोसा किया जा सकता है. अदालत की ओर से कहा गया कि परमार राजा भोज के शासनकाल के दौरान, यह स्थल संस्कृत शिक्षा के केंद्र के रूप में कार्य करता था और यहां माता सरस्वती की पूजा की जाती थी. अदालत ने उम्मीद जताई कि मुस्लिम पक्ष फैसले को पढ़ेंगे और समझेंगे.
धार का यह मामला केवल जमीन का विवाद नहीं बल्कि राम मंदिर की तरह आस्था से जुड़ा जटिल मामला है. अदालत की ओर से मार्च 2024 में ASI को जांच करने का निर्देश दिया गया था. जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आज फाइनल फैसला सुनाया गया है. तो चलिए यह समझते हैं कि यह पूरा विवाद कैसे शुरु हुआ.
धारा की भोजशाला का निर्माण राजा भोज ने 11 वीं शताब्दी में करवाया था. उन्होंने इसे एक विश्वविद्यालय की तरह स्थापित किया था. जहां पर माता सरस्वती की पूजा की जाती थी. मुख्य तौर पर यहां ग्रंथ रखे गए थे. लेकिन 13वीं और 14वीं शताब्दी के बीच अलाउद्दीन खिलजी और दिलावर खान गौरी जैसे मुस्लिम शासकों ने इसको नष्ट कर दिया. इसके बाद इसका नाम कमल मौला मस्जिद कर दिया गया. यहीं से विवाद शुरू हुआ.
ASI द्वारा 2003 में यह तय किया गया कि हर मंगलवार को इसमें हिंदू पूजा करेंगे और हर शुक्रवार को जुमे की नमाज की जाएगी. इसके अलावा बाकी दिनों पर यह पर्यटकों के लिए खुला रहेगा, लेकिन विवाद कम नहीं हुआ. हिंदू पक्ष द्वारा लगातार यहां पूजा करने की परमिशन मांगी गई. जिसके बाद 11 मार्च 2024 को इंदौर हाईकोर्ट ने ASI को सर्वे करने का आदेश दिया.
इस जांच में भोजशाला के अंदर खुदाई की गई और जीपीआर तकनीक का इस्तेमाल किया गया. इस जांच में पाया गया कि इसकी दीवारों पर सनातन धर्म से जुड़ी कलाकृतियां बनी हुई है. हालांकि दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष ने प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 का हवाला देते हुए कहा कि जो धार्मिक स्थल 15 अगस्त 1947 को जिस स्थिति में था उसे बदला नहीं जा सकता है. वहीं भोजशाला की मूल प्रतिमा अभी लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी है. जिसे अंग्रेज अधिकारी मेजर किनकेड अपने साथ ले गए थे. इस प्रतिमा को भी देश में वापस लाने की मांग की जा रही है.