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India Daily

पाकिस्तान को भारत देगा बड़ा झटका, चार दशक बाद इस प्रोजेक्ट पर काम फिर हुआ शुरू

ऑपरेशन सिंदूर के बाद रोकी गई इंडस वॉटर ट्रीटी पर भारत अब एक कदम आगे बढ़ा रहा है. जम्मू-कश्मीर सरकार झेलम नदी पर वुलर बैराज प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर रही है.

Ashutosh Rai
Edited By: Ashutosh Rai
पाकिस्तान को भारत देगा बड़ा झटका, चार दशक बाद इस प्रोजेक्ट पर काम फिर हुआ शुरू
Courtesy: X

नई दिल्लीः ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्ते एक नए निचले स्तर पर पहुंच गए थे. भारत इंसानियत के नाम पर इंडस वॉटर ट्रीटी का पालन कर रहा था, उसे ऑपरेशन सिंदूर के बाद सरकार ने रद्द कर दिया था. पाकिस्तान ने इस बारे में काफी बयान दिए, लेकिन केंद्र सरकार ने साफ कहा कि यह ट्रीटी शांति के समय के लिए थी. अगर पाकिस्तान शांति स्थापित नहीं करना चाहता, तो यह खत्म हो जाएगी. अब इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए जम्मू-कश्मीर सरकार चार दशकों से रोके गए वुलर बैराज प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करने जा रही है. इसका मकसद झेलम नदी से पानी के बहाव को स्टोर और कंट्रोल करना है.

इंडस वॉटर ट्रीटी की वजह से रोका प्रोजेक्ट

भारत सरकार और जम्मू-कश्मीर सरकार ने इंडस वॉटर ट्रीटी की वजह से इस प्रोजेक्ट को रोक दिया था. अब जब ट्रीटी सस्पेंड हो गई है, तो वहां की उमर अब्दुल्ला सरकार इसे फिर से शुरू करने का प्लान बना रही है. अधिकारियों के मुताबिक, केंद्र और राज्य सरकारें जल्द ही मिलकर काम शुरू करेंगी.

वुलर झील का स्टेटस

ऑपरेशन सिंदूर के बाद इंडस वॉटर ट्रीटी को सस्पेंड करने के फैसले के बाद, वुलर बैराज झील एक बार फिर चर्चा में आ गई है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में कहा कि उनकी सरकार केंद्र सरकार के साथ दो बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रही है. अखनूर में चिनाब नदी से जम्मू शहर को पानी की सप्लाई और झेलम पर तुलबुल प्रोजेक्ट (वुलर बैराज). ध्यान देने वाली बात है कि इस प्रोजेक्ट के लिए पहले एशियन बैंक से फंडिंग मिली थी, लेकिन इंडस ट्रीटी की वजह से इसे रोक दिया गया था.

अभी के हालात के हिसाब से, इस झील का साइज़ झेलम नदी के बहाव के हिसाब से बदलता रहता है. इसका कम से कम साइज़ 20 स्क्वायर किलोमीटर है, जबकि ज्यादा से ज्यादा साइज लगभग 190 स्क्वायर किलोमीटर है.

पाकिस्तान का आया जवाब

भारत के सिंधु जल संधि को सस्पेंड करने के बाद, पाकिस्तान लगातार बयान जारी कर रहा है. पाकिस्तान ने तो यह भी चेतावनी दी थी कि पानी रोकना युद्ध जैसा कदम माना जाएगा, लेकिन भारत अपने रुख पर कायम है. केंद्र और राज्य सरकारें जल्द ही इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने वाली हैं.