बांग्लादेश की राजनीति में एक नए युग का सूत्रपात हो गया है. हाल ही में संपन्न हुए 13वें आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया है. निर्वासन से लौटकर सत्ता के शिखर तक पहुंचने वाले तारिक रहमान ने अपनी पहली प्रेस वार्ता में देशवासियों को संबोधित किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जीत किसी एक पार्टी की नहीं बल्कि पूरे बांग्लादेश की है. जनता के अपार समर्थन ने देश में तानाशाही के दौर को समाप्त कर दिया है.
बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान ने चुनाव परिणामों के बाद शनिवार को राष्ट्र के नाम अपना पहला संबोधन दिया. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यह जीत उन सभी लोगों को समर्पित है जिन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि आज से बांग्लादेश का हर नागरिक स्वतंत्र है और उनके वास्तविक अधिकार बहाल कर दिए गए हैं. उनके अनुसार यह जनादेश भविष्य में किसी भी निरंकुश शक्ति को पनपने से रोकने के लिए एक सुरक्षा कवच है.
#WATCH | Dhaka, Bangladesh: BNP chairman Tarique Rahman says, "This victory belongs to Bangladesh. This victory belongs to democracy. This victory belongs to the people. From today, we are all free, with the true essence of freedom and rights restored. I congratulate the people… pic.twitter.com/wTeoZpHKic
— ANI (@ANI) February 14, 2026Also Read
12 फरवरी को हुए मतदान के परिणामों ने बीएनपी को देश की सबसे बड़ी शक्ति बना दिया है. कुल 209 सीटें जीतकर पार्टी ने सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत के आंकड़े को आसानी से पार कर लिया है. खुद तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगुरा-6 दोनों निर्वाचन क्षेत्रों से शानदार जीत दर्ज की है. डेढ़ दशक के लंबे अंतराल के बाद देश में एक ऐसी संसद और सरकार की स्थापना होने जा रही है जो सीधे तौर पर जनता के प्रति जवाबदेह होगी.
जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन के बाद यह बांग्लादेश का पहला चुनाव था. उस विद्रोह के कारण पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद छोड़ना पड़ा था और वे वर्तमान में भारत में शरण लिए हुए हैं. उनकी पार्टी अवामी लीग को इस बार चुनाव में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया था. तारिक रहमान ने इस बात पर जोर दिया कि जनता ने अपनी इच्छाशक्ति से सभी बाधाओं को पार करते हुए देश को गुलामी और अधीनता से बचाने का काम किया है.
तारिक रहमान का सत्ता तक पहुंचने का सफर संघर्षों से भरा रहा है. वे लंदन में लगभग 17 वर्षों का आत्म-निर्वासन काटकर दिसंबर 2025 में स्वदेश लौटे थे. उनकी वापसी के कुछ ही दिनों बाद उनकी मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन हो गया था. अब तारिक रहमान अपनी मां की विरासत को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने के लिए तैयार हैं. बता दें कि वह 1991 के बाद बांग्लादेश के पहले पुरुष प्रधानमंत्री बनने का गौरव हासिल करेंगे.
आम चुनाव के साथ हुए राष्ट्रीय जनमत संग्रह ने बांग्लादेश के भविष्य की रूपरेखा तय कर दी है. जुलाई राष्ट्रीय चार्टर में प्रस्तावित संवैधानिक सुधारों को जनता का भारी समर्थन मिला है. इन सुधारों के माध्यम से शासन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने की तैयारी है. तारिक रहमान ने लोगों से एकजुट रहने की अपील की ताकि कोई भी बाहरी या आंतरिक शक्ति देश को अस्थिर न कर सके. अब बांग्लादेश एक संप्रभु और स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में नई ऊंचाइयां छूने को तैयार है.