नई दिल्ली: बांग्लादेश की राजनीति अब एक ऐतिहासिक बदलाव के मुहाने पर खड़ी है. अगस्त 2024 के छात्र आंदोलनों और शेख हसीना के 15 साल के शासन के अंत के बाद देश में पहली बार निर्वाचित सरकार का गठन होने जा रहा है. तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने इन चुनावों में भारी जीत दर्ज की है. अब 17 फरवरी को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की औपचारिक वापसी सुनिश्चित हो जाएगी.
बीएनपी ने 297 घोषित सीटों में से 209 पर कब्जा जमाकर दो-तिहाई बहुमत का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है. दक्षिणपंथी जमात-ए-इस्लामी को 68 सीटें मिली हैं. चुनाव आयोग ने प्रत्याशी की मौत के कारण एक सीट पर मतदान टाल दिया है, जबकि चटगांव-2 और चटगांव-4 के नतीजे फिलहाल स्थगित हैं. 59.44 प्रतिशत मतदान के साथ आए इस जनादेश ने स्पष्ट कर दिया है कि जनता अब देश में स्थिरता, विकास और नए नेतृत्व की ओर बड़ी उम्मीदों से देख रही है.
शपथ ग्रहण की प्रक्रिया में कुछ कानूनी और संवैधानिक पेच भी सामने आए हैं. पिछली संसद के स्पीकर इस्तीफा देने के बाद अज्ञात जगह पर हैं और डिप्टी स्पीकर वर्तमान में जेल में हैं. चूंकि नए सांसदों को शपथ दिलाने की मुख्य जिम्मेदारी स्पीकर की होती है, इसलिए उनकी अनुपस्थिति ने प्रक्रिया को जटिल बना दिया है. हालांकि, संविधान राष्ट्रपति को यह शक्ति प्रदान करता है कि वे ऐसी स्थिति में किसी भी योग्य व्यक्ति को इस महत्वपूर्ण कार्य को संपन्न करने के लिए नियुक्त कर सकें.
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दिन नवनिर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाएंगे. इसके बाद राष्ट्रपति भवन यानी बंगभवन में नई कैबिनेट का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा. संविधान की शर्तों के अनुसार, नए सांसदों के शपथ ग्रहण से पहले नई कैबिनेट का शपथ लेना आवश्यक है. राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन इस समारोह की अध्यक्षता करेंगे. प्रशासन ने इस महत्वपूर्ण दिवस के लिए बंगभवन और संसद परिसर में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम और सभी आवश्यक भव्य तैयारियां अब पूरी कर ली हैं.
यह चुनाव बांग्लादेश के लिए एक नई सुबह की तरह है, जो अगस्त 2024 के गहरे राजनीतिक शून्य के बाद आया है. शेख हसीना के भारत पलायन के बाद देश की कमान मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के हाथों में थी. अब एक निर्वाचित सरकार के आने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बांग्लादेश की साख और विश्वसनीयता बढ़ेगी. छात्र आंदोलनों ने जिस बदलाव की नींव रखी थी, उसे अब एक सुदृढ़ लोकतांत्रिक ढांचे के माध्यम से मूर्त रूप देने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए जा रहे हैं.
सत्ता की बागडोर संभालते ही तारिक रहमान के सामने आर्थिक स्थिरता और कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने की बड़ी चुनौतियां होंगी. दो दशक बाद सत्ता में वापसी कर रही बीएनपी को जनता की भारी उम्मीदों पर खरा उतरना होगा. चटगांव की स्थगित सीटों पर निर्णय और शासन में पारदर्शिता लाना नई सरकार की पहली प्राथमिकता होगी. 17 फरवरी का यह शपथ ग्रहण केवल एक राजनैतिक रस्म नहीं, बल्कि बांग्लादेश के भविष्य को संवारने और लोकतांत्रिक मूल्यों को पुनः स्थापित करने का एक साझा संकल्प है.