बीजिंग में स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फीको से मुलाकात के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि अगर युद्ध समाप्त होता है तो यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के कई विकल्प हो सकते हैं. उन्होंने भरोसा जताया कि इस मुद्दे पर सहमति बनने की संभावना है. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस, यूक्रेन की यूरोपीय संघ में सदस्यता का विरोध नहीं करता, लेकिन नाटो में शामिल होना लंबे समय तक भी अस्वीकार्य रहेगा.
पुतिन का कहना है कि अगर युद्ध खत्म होता है तो यूक्रेन के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर बातचीत संभव है. उन्होंने यह भी बताया कि इस विषय पर उनकी चर्चा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अलास्का में हुई थी. वहीं दूसरी तरफ यूक्रेन के राष्ट्रपति वोदोदिमिर जेलेंस्की ने साफ किया है कि उनकी सुरक्षा गारंटी केवल शब्दों में नहीं बल्कि 'नाटो जैसी' ठोस साझेदारी के रूप में होनी चाहिए. इसी को लेकर यूक्रेन और उसके सहयोगी देशों ने काम तेज कर दिया है.
वहीं नाटो महासचिव मार्क रुटे ने कहा कि यूक्रेन को केवल अपनी मजबूत सेना पर निर्भर नहीं रहना चाहिए बल्कि उसे अपने सहयोगियों से सुरक्षा गारंटी भी मिलनी चाहिए. रुटे ने यह बयान लक्ज़मबर्ग में दिया, जहां उन्होंने कहा कि अमेरिका, यूरोप और अन्य सहयोगी देश मिलकर इस सुरक्षा व्यवस्था के खाके पर काम कर रहे हैं. वहीं जर्मनी और यूरोपीय खुफिया एजेंसियों का आंकलन है कि आने वाले पांच वर्षों में रूस यूरोप पर हमले की स्थिति में हो सकता है. यही कारण है कि नाटो देशों पर रक्षा खर्च बढ़ाने का दबाव लगातार बढ़ रहा है.
पुतिन ने यूरोप पर हमले की आशंका को खारिज करते हुए कहा कि रूस को लेकर जो दहशत फैलाई जा रही है वह पूरी तरह बेबुनियाद है. उन्होंने कहा कि यह या तो उकसावे की कोशिश है या फिर पूरी तरह अज्ञानता. पुतिन का कहना है कि रूस का उद्देश्य किसी पर हमला करना नहीं है, बल्कि अपनी सुरक्षा चिंताओं को लेकर संतुलन बनाना है.
बैठक के दौरान पुतिन ने यह भी कहा कि रूस और अमेरिका, यूक्रेन के ज़ापोरिज़िया परमाणु संयंत्र पर मिलकर काम कर सकते हैं, जिसे रूस ने युद्ध की शुरुआत में ही कब्जे में ले लिया था. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्लोवाकिया में रूस अमेरिकी कंपनी वेस्टिंगहाउस के साथ मिलकर परमाणु संयंत्र बना सकता है. स्लोवाकिया का रूस की गैज़प्रोम कंपनी के साथ 2034 तक का दीर्घकालिक गैस अनुबंध है और भले ही यूक्रेन के रास्ते गैस ट्रांज़िट बंद हो गया हो, लेकिन हंगरी के जरिये तुर्कस्ट्रीम पाइपलाइन से देश को अब भी गैस मिल रही है.