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India Daily

'पूर्व आर्मी चीफ नरवणे की किताब कैसे आई लोगों के पास' दिल्ली पुलिस ने पेंगुइन रैंडम हाउस को नोटिस भेज मांगा जवाब

दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरावणे की अप्रकाशित किताब के पीडीएफ लीक होने पर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया को नोटिस जारी किया. पुलिस ने पूछा है कि किताब कैसे सार्वजनिक हुई, जबकि प्रकाशक का कहना है कि कोई कॉपी जारी नहीं की गई.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
'पूर्व आर्मी चीफ नरवणे की किताब कैसे आई लोगों के पास' दिल्ली पुलिस ने पेंगुइन रैंडम हाउस को नोटिस भेज मांगा जवाब
Courtesy: social media

दिल्ली पुलिस ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरावणे की अप्रकाशित संस्मरण ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के अनधिकृत पीडीएफ प्रसार पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. बुधवार सुबह स्पेशल सेल ने प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया को नोटिस भेजा. पुलिस का कहना है कि किताब की सॉफ्ट कॉपी अवैध रूप से लीक होकर इंटरनेट पर फैल गई है.

सोमवार को ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट और आपराधिक षड्यंत्र के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि लीक किसने किया और प्रकाशक की क्या भूमिका थी. प्रकाशक ने स्पष्ट किया है कि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई और कोई कॉपी जारी नहीं की गई.

नोटिस जारी कर मांगा गया जवाब

पुलिस ने पेंगुइन रैंडम हाउस को लिखित नोटिस भेजकर कई सवाल पूछे हैं. इसमें किताब कैसे सार्वजनिक हुई, प्रकाशन प्रक्रिया क्या थी और लीक रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए, यह सब जानना चाहा गया है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हम जांच कर रहे हैं कि प्रकाशक क्या कर रहा था और किताब बिना अनुमति के कैसे बाहर आई. नोटिस में जवाब मांगा गया है ताकि मामले की पूरी तस्वीर साफ हो सके.

एफआईआर में गंभीर धाराएं लगाई गईं

सोमवार को दिल्ली पुलिस ने ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट की धाराओं के साथ आपराधिक षड्यंत्र जैसे अन्य अपराधों में एफआईआर दर्ज की. पुलिस का मानना है कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो सकता है. लीक हुई कॉपी में संवेदनशील जानकारी होने की आशंका है. जांच में यह देखा जा रहा है कि लीक का स्रोत प्रकाशन घर है या कोई और. पुलिस सभी संभावित पहलुओं की तह तक जाने की कोशिश कर रही है.

प्रकाशक का स्पष्ट बयान

पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने सोमवार को बयान जारी कर कहा कि उनके पास किताब के प्रकाशन के विशेष अधिकार हैं. किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है और न ही प्रिंट या डिजिटल रूप में कोई कॉपी जनता के लिए जारी की गई है. प्रकाशक ने चेतावनी दी है कि इंटरनेट पर घूम रही कोई भी कॉपी, चाहे पीडीएफ हो या प्रिंट, कॉपीराइट उल्लंघन मानी जाएगी. कंपनी ने कहा कि वह इस मामले की गंभीरता समझती है.

लीक का स्रोत ढूंढने में जुटी पुलिस

पुलिस अब मुख्य रूप से यह पता लगाने में लगी है कि अप्रकाशित किताब की सॉफ्ट कॉपी आखिरकार किसने लीक की. जांच में तकनीकी सबूतों और डिजिटल ट्रेस की मदद ली जा रही है. प्रकाशक के साथ सहयोग की उम्मीद है. यह मामला किताब प्रकाशन की सुरक्षा और गोपनीयता पर भी सवाल खड़े कर रहा है. पुलिस का कहना है कि जल्द ही जांच के नतीजे सामने आएंगे.