मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह कई महत्वपूर्ण घटनाओं से भरा रहने वाला है. 26 जून को मुहर्रम के कारण बाजार बंद रहेगा, जिससे निवेशकों को केवल चार दिनों के कारोबार का अवसर मिलेगा. इस दौरान वैश्विक और घरेलू दोनों कारक बाजार की चाल पर असर डाल सकते हैं. खासकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक गतिविधियां, विदेशी निवेशकों की रणनीति, रुपये की स्थिति और आईटी सेक्टर की कमजोरी निवेशकों की नजर में रहेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी के लिए 24,500 का स्तर एक बड़ा लक्ष्य बन सकता है.
मिडिल ईस्ट में हालात फिलहाल निवेशकों की चिंता का प्रमुख कारण बने हुए हैं. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए बातचीत जारी है लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने अनिश्चितता को पूरी तरह खत्म नहीं किया है. ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर दिए गए बयानों और अमेरिकी प्रतिक्रिया ने ऊर्जा बाजारों में हलचल पैदा की है. दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है. ऐसे में किसी भी नई खबर का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और भारतीय बाजार की धारणा पर पड़ सकता है. निवेशक स्विट्जरलैंड में चल रही वार्ता के नतीजों पर बारीकी से नजर बनाए रखेंगे.
पिछले कारोबारी सप्ताह में आईटी शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली. इंफोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक जैसे बड़े शेयर दबाव में रहे. इसकी प्रमुख वजह वैश्विक मांग को लेकर बढ़ी चिंताएं और अमेरिकी कंसल्टिंग कंपनी एक्सेंचर द्वारा अपने राजस्व वृद्धि अनुमान में कटौती करना रहा. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक टेक खर्च कमजोर रहता है तो भारतीय आईटी कंपनियों की आय पर भी असर पड़ सकता है. तकनीकी संकेतक भी फिलहाल इस सेक्टर में कमजोरी का संकेत दे रहे हैं, जिससे निवेशकों की सतर्कता बढ़ गई है.
लंबे समय तक बिकवाली करने के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार में फिर से खरीदारी शुरू की है. बीते सप्ताह एफआईआई ने लगभग 3,400 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी 7,100 करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी की. यह रुझान बाजार के लिए सकारात्मक माना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है. खासकर बैंकिंग और बड़े शेयरों में इसका असर अधिक देखने को मिल सकता है.