Digital Arrest Scam: डिजिटल अरेस्ट स्कैम काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है. आए दिन लोग इसका शिकार बनते जा रहे हैं. हाल ही में हैदराबाद के एक व्यक्ति को 20 दिन डिजिटल तौर पर अरेस्ट रहने के बाद 1.2 करोड़ रुपये गंवाने पड़े. यह मामला 7 मई से शुरू हुआ. एक व्यक्ति ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए विक्टिम को कॉल किया और कहा कि उसके नाम पर एक पार्सल में ड्रग्स है और उसे जब्त कर लिया गया है.
एक रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी ने पीड़ित से कहा कि वह बिना किसी गलती के अपनी सभी निजी जानकारी शेयर करें और उसे 24/7 ऑनलाइन रहने के लिए कहा. हैदराबाद में रहने वाले व्यक्ति ने बताया कि वो 20 दिनों तक ठीक से सो भी नहीं पाया और न ही खा पाया. स्कैमर्स ने उसे बहुत ज्यादा डराया कि उस पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है. व्यक्ति ने बताया कि उसने शुरू में 30 लाख रुपये दिए और फिर लगातार बढ़ती मांग को लेकर उसने कुल मिलाकर 1.2 करोड़ रुपये का पेमेंट किया. इस पूरी घटना से व्यक्ति और उसके परिवार की मेंटल हेल्थ पर बुरा असर हुआ. फिलहाल इस मामले की जांच चल रही है.
इस तरह के मामलों से निपटने के लिए आपको पहले ये जानना होगा कि आखिर डिजिटल अरेस्ट स्कैम कैसे काम करता है और इस तरह के स्कैम से आपको कैसे बचना है.
फर्जी पुलिस कॉल: स्कैमर ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए व्यक्ति को अपनी सारी निजी जानकारी शेयर करने के लिए मना लेते हैं.
लगातार कॉन्टैक्ट: स्कैमर्स व्यक्ति को 24/7 ऑनलाइन रहने का निर्देश देते हैं.
डराना: व्यक्ति को बरगलाने के लिए कानूनी धमकी देते हैं और डराते हैं. व्यक्ति को यह कहा जाता है कि अगर उसने सहयोग नहीं किया तो उसे जेल जाना पड़ सकता है या फिर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.
अलग करना और पैसे मांगना: इस तरह के स्कैम में व्यक्ति को ज्यादा से ज्यादा समय के लिए बाहरी दुनिया से अलग रखा जाता है. साथ ही उससे मामले को निपटाने के लिए पैसों की मांग की जाती है.
हमेशा कॉल करने वाले को वेरीफाई करना चाहिए. बिना कॉलर को वेरिफाई किए न तो डरें और न ही कोई कॉल उठाएं.
किसी के साथ भी निजी जानकारी शेयर न करें. जब तक आप यह सुनिश्चित न कर लें कि आप बात किससे कर रहे हैं तब तक फोन पर कोई भी निजी या फाइनेंशियल जानकारी न दें.
अगर सामने वाला व्यक्ति आपसे बहुत ज्यादा डिमांड कर रहा है जैसे अर्जेंट पैसे मांग रहा या कानून की धमकी दे रहा है तो इससे सावधान रहें. फोन तुरंत काट दें.
किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट करें और बैंक को जानकारी दें.