उत्तराखंड सरकार राज्य को वर्षभर पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में लगातार नए कदम उठा रही है. इसी कड़ी में अब बहुप्रतीक्षित हिमालयन कार रैली की वापसी की तैयारी शुरू हो गई है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विशेष प्रयासों के बाद इस प्रतिष्ठित आयोजन को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया है. सरकार का मानना है कि यह पहल पर्यटन के साथ साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति देगी.
हाल ही में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को हिमालयन कार रैली की तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के बर्फ से ढके पहाड़, प्राकृतिक सौंदर्य और चुनौतीपूर्ण सड़कें एडवेंचर टूरिज्म के लिए बेहद उपयुक्त हैं. मुख्यमंत्री का मानना है कि ऐसे आयोजन राज्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. इसके लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करने को कहा गया है.
उत्तराखंड में पर्यटन का सबसे अधिक दबाव गर्मियों और चारधाम यात्रा सीजन के दौरान देखने को मिलता है. सरकार अब सर्दियों में भी पर्यटकों को आकर्षित करने की रणनीति पर काम कर रही है. हिमालयन कार रैली इसी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है. बर्फीले रास्तों और ऊंचे पहाड़ी इलाकों से गुजरने वाली यह रैली रोमांच पसंद पर्यटकों और मोटर स्पोर्ट्स प्रेमियों को आकर्षित करेगी. इससे राज्य को विंटर टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में नई पहचान मिलने की उम्मीद है.
सरकार का अनुमान है कि रैली के आयोजन से होटल, होमस्टे, टैक्सी सेवाओं, स्थानीय बाजारों, रेस्टोरेंट और हस्तशिल्प कारोबार को सीधा लाभ मिलेगा. विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे. सर्दियों में जहां पर्यटन गतिविधियां अपेक्षाकृत कम हो जाती हैं, वहां इस तरह के आयोजन आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद करेंगे. हिमालयन कार रैली के संचालन और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी कुमाऊं मंडल विकास निगम और गढ़वाल मंडल विकास निगम को सौंपी गई है.
दोनों संस्थाएं रैली के संभावित रूट, प्रतिभागियों की सुरक्षा, ठहरने की व्यवस्था और अन्य जरूरी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं. आयोजन को सफल बनाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है.
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयन कार रैली केवल एक खेल आयोजन नहीं बल्कि उत्तराखंड की वैश्विक ब्रांडिंग का बड़ा माध्यम बन सकती है. इसके जरिए राज्य के दूरस्थ और खूबसूरत इलाकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी. यह आयोजन एडवेंचर टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन और इको टूरिज्म को भी बढ़ावा देगा. इससे उत्तराखंड को पर्यटन क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा.