मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने के उद्देश्य से अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते को दुनिया भर में सकारात्मक कदम माना जा रहा था. हालांकि इस समझौते की घोषणा के महज एक दिन बाद दक्षिणी लेबनान में हुई हिंसा ने क्षेत्र में स्थायी शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है.
लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के अनुसार इजरायली हवाई हमलों और तोपखाने की गोलाबारी में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, हमले दक्षिणी लेबनान के नबातीह जिले में रातभर जारी रहे.
मिडिया रिपोर्ट के मुताबिक नबातीह शहर, केफर जौज, केफर रेमन और जेबदीन जैसे इलाकों में भारी गोलाबारी की गई. इसके बाद इजरायली लड़ाकू विमानों ने केफर टिब्निट और रेहान ऊंचाइयों पर हवाई हमले किए. स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, कई रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया, जिससे नागरिकों को भारी नुकसान पहुंचा. कुछ लोग अभी भी मलबे के नीचे दबे होने की आशंका जताई जा रही है, जिसके चलते बचाव अभियान जारी है.
जानकारी के अनुसार, नबातीह और हारौफ में कम से कम आठ लोगों की मौत हुई. वहीं अल-शरकिया और डौएर के बीच स्थित एक मकान पर हुए हमले में चार लोगों की जान चली गई. केफर सर क्षेत्र में तीन अन्य लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. एक अन्य घटना में डौएर नगर पालिका भवन के निकट एक मोटरसाइकिल को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किया गया, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया. यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और ईरान ने हाल ही में 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं. इस समझौते को मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.
समझौते के प्रमुख बिंदुओं में यह स्पष्ट किया गया था कि लेबनान सहित क्षेत्र के सभी मोर्चों पर सैन्य गतिविधियों और शत्रुता को तुरंत और स्थायी रूप से समाप्त किया जाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने इस समझौते को डिजिटल माध्यम से मंजूरी दी थी.
अमेरिका-ईरान समझौते में केवल सैन्य संघर्ष रोकने की बात नहीं की गई है, बल्कि कई महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक बिंदुओं को भी शामिल किया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि लेबनान में हुए ताजा हमले यह संकेत देते हैं कि मध्य पूर्व में शांति स्थापित करना अभी भी आसान नहीं होगा. अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने के बावजूद क्षेत्रीय संघर्षों, सुरक्षा चिंताओं और विभिन्न पक्षों के हितों के चलते हालात जटिल बने हुए हैं.