अल्मोड़ा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रीमद्भागवत के महत्व पर अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि वे समय-समय पर इसका अध्ययन करते हैं और इससे मानसिक शांति, आत्मविश्वास तथा जीवन की चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है. उनके अनुसार यह ग्रंथ व्यक्ति को सही दिशा दिखाने का कार्य करता है.
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को समझने का माध्यम भी है. उन्होंने बताया कि इसका अध्ययन करने से मन शांत और संतुलित रहता है. व्यक्ति के भीतर आत्मबल विकसित होता है और वह बाहरी या आंतरिक भय से प्रभावित हुए बिना अपने कर्तव्यों का पालन करने की क्षमता प्राप्त करता है. उनका मानना है कि यह आध्यात्मिक शक्ति जीवन के हर क्षेत्र में उपयोगी साबित होती है.
धामी ने कहा कि जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियां आती हैं जब व्यक्ति दुविधा में पड़ जाता है. सही और गलत के बीच निर्णय लेना आसान नहीं होता. ऐसे समय में श्रीमद्भागवत धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है. उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने कर्मों को ईश्वर को समर्पित कर आगे बढ़ता है, तब निर्णय लेना सरल हो जाता है और मन में स्पष्टता बनी रहती है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि आध्यात्मिक चिंतन व्यक्ति के विचारों को मजबूत बनाता है. इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन की बाधाओं का सामना करने की शक्ति मिलती है. उन्होंने लोगों को भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ने का संदेश देते हुए कहा कि ऐसे ग्रंथ केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन और सकारात्मक सोच की भी सीख देते हैं.