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वृंदावन में बन रहा दुनिया का सबसे ऊंचा चंद्रोदय मंदिर, जानें कब तक होगा तैयार जिसका PM मोदी कर सकते हैं लोकार्पण

वृंदावन चंद्रोदय मंदिर का साउथ ब्लॉक तैयार हो गया है. पीएम मोदी को उद्घाटन के लिए बुलाने की योजना है. चलिए जानते हैं क्या है इस मंदिर की खासियत और पूरा होने में कितना समय लगेगा.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
वृंदावन में बन रहा दुनिया का सबसे ऊंचा चंद्रोदय मंदिर, जानें कब तक होगा तैयार जिसका PM मोदी कर सकते हैं लोकार्पण
Courtesy: @Chakri_music X account

वृंदावन: वृंदावन में निर्माणाधीन चंद्रोदय मंदिर जो दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर बनने वाला है. उसका दक्षिणी हिस्सा अब पूरा हो चुका है. मंदिर परिसर के भीतर इसके औपचारिक उद्घाटन की तैयारियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं. मुख्य मंदिर संरचना पर निर्माण कार्य भी जल्द ही शुरू होने वाला है.

ठाकुर श्री श्री वृंदावनचंद्र को समर्पित यह मंदिर कुतुब मीनार से तीन गुना ऊंचा होगा. जहां कुतुब मीनार की ऊंचाई 73 मीटर है, वहीं यह 70-मंजिला मंदिर जो दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर बनने वाला है. 212 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचेगा. मुख्य मंदिर संरचना की आधारशिला अभी रखी जानी बाकी है.

उद्घाटन को लेकर क्या है प्लानिंग?

मंदिर प्रबंधन ने मंदिर के दक्षिणी हिस्से का उद्घाटन करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करने की योजना बनाई है. यदि प्रधानमंत्री मोदी मंदिर का उद्घाटन करने का निमंत्रण स्वीकार करते हैं, तो वे साथ ही चंद्रोदय मंदिर की मुख्य संरचना की आधारशिला भी रखेंगे. हालांकि प्रधानमंत्री की यात्रा के संबंध में स्थिति अभी तक अपुष्ट बनी हुई है.

क्या है इस मंदिर की खासियत?

चंद्रोदय मंदिर, छटीकरा रोड पर स्थित अक्षय पात्र फाउंडेशन के 110 एकड़ के परिसर के भीतर लगभग आठ एकड़ भूमि पर स्थापित किया जा रहा है. पूरा होने पर यह मंदिर 70 मंजिल ऊंचा होगा, जिसकी ऊंचाई 212 मीटर तक पहुंचेगी. मंदिर की सबसे ऊपरी मंजिल पर भगवान श्री राधा कृष्ण के विग्रह यानी मूर्तियां स्थापित किए जाएंगे. ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि आगंतुक मंदिर के शिखर से पूरे ब्रज मंडल क्षेत्र का विहंगम दृश्य देख सकें.

मंदिर के आठ एकड़ के परिसर के भीतर बरसाना, गोवर्धन और वृंदावन जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों की प्रतिकृतियां बनाई जाएंगी. इसके अतिरिक्त तीन लोकों पृथ्वी लोक, स्वर्ग लोक और गोलोक वृंदावन के स्वरूप मंदिर की ऊपरी दीर्घाओं में स्थापित किए जाएंगे. मंदिर के ऊपरी तलों तक पहुंच को सुगम बनाने के लिए आठ लिफ्टों का उपयोग किया जाएगा. PM मोदी दक्षिण ब्लॉक के उद्घाटन के साथ मुख्य मंदिर की आधारशिला रख सकते हैं.

कितनी है अनुमानित लागत?

ISKCON बेंगलुरु द्वारा निर्मित किए जा रहे इस मंदिर के 2014 में हुए भूमि पूजन समारोह के दौरान इसकी अनुमानित लागत ₹400 करोड़ बताई गई थी. हालांकि समय बीतने के साथ, अब इसकी अनुमानित लागत लगभग ₹1,400 करोड़ होने का अनुमान है. इस मंदिर के आंतरिक सज्जा यानी इंटीरियर को डिजाइन करने की जिम्मेदारी जिसमें खजुराहो और आधुनिक वास्तुकला शैलियों का संगम देखने को मिलता है. विदेशी कारीगरों को सौंपी गई है.

कब रखी गई थी आधारशिला?

मंदिर की आधारशिला 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने रखी थी. उस समय मंदिर के पूरा होने की समय सीमा 2018 तय की गई थी. हालांकि काम तय समय पर पूरा नहीं हो सका, इसलिए समय सीमा बढ़ाकर 2028 कर दी गई. अब जब अगले महीने मुख्य मंदिर की आधारशिला रखे जाने की संभावना है, तो यह उम्मीद की जा रही है कि इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में और आठ साल लगेंगे.