उत्तर प्रदेश पुलिस एक बार फिर विवादों में घिर गई है. इस बार मामला लखनऊ पुलिस लाइन से जुड़ा है. यहां ड्यूटी लगाने के नाम पर अवैध वसूली का आरोप है. आरोप किसी ओर ने नहीं बल्कि खुद यूपी पुलिस के सिपाही ने लगाए हैं. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सिपाही ने पुलिस विभाग के भीतर चल रही भ्रष्टाचार व्यवस्था का खुलासा किया है.
लखनऊ पुलिस लाइन में तैनात सिपाही सुनील कुमार शुक्ला ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में दावा किया कि पुलिस विभाग के अंदर एक सुनियोजित वसूली तंत्र काम कर रहा है. उनके मुताबिक ड्यूटी लगाने और सुविधाजनक पोस्टिंग देने के बदले पुलिसकर्मियों से हर महीने पैसे वसूले जाते हैं. वीडियो में उन्होंने कुछ आईपीएस अधिकारियों को काला अंग्रेज बताते हुए आरोप लगाया कि पूरी व्यवस्था उनके संरक्षण में चल रही है. सुनील ने कहा कि सिपाही और दीवान जैसे निचले स्तर के कर्मचारियों पर आर्थिक दबाव बनाया जाता है. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस पूरे मामले में हस्तक्षेप कर कार्रवाई करने की मांग की है.
"माननीय मुख्यमंत्री जी, मैं लखनऊ कमिश्नरेट तथा उत्तर प्रदेश के अन्य जनपदों में इन काले अंग्रेज अर्थात आईपीएस अधिकारियों द्वारा चलाई जा रही भ्रष्टाचाररूपी जमींदारी व्यवस्था पर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं.."
वीडियो में बोल रहा कांस्टेबल का नाम सुनील कुमार शुक्ला है.. उत्तर… pic.twitter.com/GIyRoR92Qb— Vivek K. Tripathi (@meevkt) May 7, 2026Also Read
सिपाही सुनील शुक्ला ने अपने आरोपों में कहा कि पुलिस लाइन में वसूली का नेटवर्क कई स्तरों पर संचालित होता है. उनके अनुसार सबसे पहले आरआई यानी रिजर्व इंस्पेक्टर की नियुक्ति होती है, जिसके बाद गणना प्रभारी और फिर गारद कमांडर की भूमिका आती है. आरोप है कि ड्यूटी पाने के लिए सिपाहियों और दीवानों को हर महीने दो हजार रुपये तक देने पड़ते हैं. गारद कमांडर इन पैसों को इकट्ठा कर आगे अधिकारियों तक पहुंचाते हैं. सुनील ने दावा किया कि यह व्यवस्था केवल लखनऊ तक सीमित नहीं बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह काम कर रही है. वीडियो में उन्होंने इसे भ्रष्टाचार की जमींदारी व्यवस्था बताया.
वीडियो में सुनील शुक्ला ने वसूली की रकम को लेकर भी बड़ा दावा किया. उन्होंने बताया कि लखनऊ पुलिस लाइन की एक गणना में लगभग 500 से ज्यादा पुलिसकर्मी शामिल हैं. इनमें से करीब 400 को नियमित ड्यूटी दी जाती है. आरोप के अनुसार यदि हर कर्मचारी से दो हजार रुपये प्रति माह लिए जाएं तो केवल एक गणना से लगभग आठ लाख रुपये की वसूली होती है. लखनऊ पुलिस लाइन में ऐसी चार गणनाएं होने का दावा किया गया है. इस हिसाब से हर महीने लाखों रुपये की अवैध वसूली का आरोप सामने आया है.
वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस विभाग में हलचल बढ़ गई है. लखनऊ पुलिस कमिश्नर ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं. अधिकारियों का कहना है कि वीडियो और लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी. वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है.