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ग्रेटर नोएडा के अस्पताल में 6 वर्षीय बच्चे की जिंदगी के साथ खिलवाड़, MRI के दौरान बेहीश की ज्यादा डोज से मौत

ग्रेटर नोएडा के एक निजी निदान केंद्र में लापरवाही की वजह से एक 6 साल के मासूम की जान चली गई. आरोप है कि अत्यधिक बेहोशी की दवा से बच्चे की मौत हो गई.

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Edited By: Reepu Kumari
ग्रेटर नोएडा के अस्पताल में 6 वर्षीय बच्चे की जिंदगी के साथ खिलवाड़, MRI  के दौरान बेहीश की ज्यादा डोज से मौत
Courtesy: Pinterest

ग्रेटर नोएडा के एक निजी निदान केंद्र में गुरुवार को एमआरआई प्रक्रिया के दौरान एक छह वर्षीय लड़के की कथित तौर पर मौत हो गई. पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि उसके परिवार ने केंद्र पर घोर चिकित्सा लापरवाही और अत्यधिक बेहोशी की दवा देने का आरोप लगाया है. घटना की जांच शुरू कर दी गई है और चिकित्सा जांच की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद औपचारिक प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की जाएगी.

दौड़ा पड़ने की थी शिकायत

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गुरुवार शाम 4 बजे बीटा 2 पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत के अनुसार, डूंगरपुर गांव के एक बच्चे को लगभग 15-20 दिन पहले हल्का दौरा पड़ा था और उसका इलाज एक निजी अस्पताल में किया गया था. पूरी तरह ठीक होने के बाद, डॉक्टरों ने एहतियाती जांच के तौर पर एमआरआई और ईईजी कराने की सलाह दी. 

पहले घर पर खेल रहा था

'स्कैन वाले दिन वह पूरी तरह से सामान्य था और एमआरआई के लिए ले जाने से पहले घर पर खेल रहा था,” लड़के के पिता, विक्की, जो एक किसान हैं, ने शिकायत में लिखा. एमआरआई ग्रेटर नोएडा के सेक्टर फी-III स्थित केबी हेल्थकेयर में किया गया था. परिवार के अनुसार, लड़के को उसके मामा और एक अन्य रिश्तेदार वहां ले गए थे.

'पहले ही दवा दी जा चुकी है'

विकी ने आरोप लगाया कि प्रक्रिया के दौरान जटिलताएं शुरू हो गईं. अपनी शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र के कर्मचारियों ने अतिरिक्त पैसे की मांग की और कहा कि बच्चे को दोबारा बेहोश करना पड़ेगा. उन्होंने आरोप लगाया, 'विरोध के बावजूद, दवा की एक और खुराक दी गई.' विकी ने आगे दावा किया कि उन्होंने बाद में एक कर्मचारी को दूसरे से यह कहते हुए सुना कि बच्चे को 'पहले ही दवा दी जा चुकी है', जिससे उनमें घबराहट फैल गई.

बच्चे की बिगड़ी हालत

परिवार ने अपनी शिकायत में आगे आरोप लगाया कि बच्चे की बिगड़ती हालत पर प्रतिक्रिया देने में देरी हुई. शिकायत के अनुसार, दूसरी खुराक देने के बाद बच्चे को लगभग आधे घंटे तक ऑपरेशन कक्ष में ही रखा गया. विक्की ने आरोप लगाया, 'बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उसे तुरंत बाहर नहीं लाया गया. जब रिश्तेदार आखिरकार कमरे में पहुंचे, तो बच्चा बेसुध पड़ा हुआ था.'

जब उसकी हालत बिगड़ने लगी, तो परिवार ने आरोप लगाया कि अस्पताल के कर्मचारियों ने उसे पहले वाले अस्पताल के बजाय किसी दूसरे निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की सलाह दी. एक रिश्तेदार ने बताया, 'तब तक बच्चे का शरीर ठंडा पड़ चुका था.' दूसरे अस्पताल में डॉक्टरों ने सुबह करीब 10:30 बजे उसे मृत घोषित कर दिया.

जांच के आदेश दिए

पुलिस ने बताया कि कथित चिकित्सा लापरवाही के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार, चिकित्सा जांच पूरी होने के बाद ही एफआईआर दर्ज की जाएगी. बीटा 2 पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर विनोद कुमार ने कहा, 'मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय द्वारा जांच के आदेश दिए गए हैं और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.'