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डिजिटल युग में पंजाब सबसे आगे! मान सरकार ने स्कूलों में AI क्रांति का किया आगाज

पंजाब सरकार ने शिक्षा जगत में बड़ा कदम उठाते हुए सरकारी स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की पढ़ाई शुरू करने का ऐलान किया है. मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में शुरू हुई इस पहल का मकसद बच्चों को सिर्फ आधुनिक तकनीक से जोड़ना ही नहीं, बल्कि उन्हें भविष्य का नेतृत्व करने योग्य बनाना भी है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
डिजिटल युग में पंजाब सबसे आगे! मान सरकार ने स्कूलों में AI क्रांति का किया आगाज
Courtesy: social media

Punjab news: भारत में जहां शिक्षा व्यवस्था अभी भी परंपरागत ढांचे में जकड़ी हुई है, वहीं पंजाब ने डिजिटल युग की ओर तेज कदम बढ़ाते हुए पूरे देश को चौंका दिया है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार ने कक्षा VI से XII तक के बच्चों के लिए AI कोर्स लागू कर दिया है. 

इसके साथ ही 10,000 शिक्षकों को प्रशिक्षण देकर तैयार किया जा रहा है और 89.1% स्कूलों को स्मार्ट क्लासरूम से लैस कर दिया गया है. यह पहल न केवल पंजाब बल्कि पूरे देश में शिक्षा के भविष्य की दिशा बदलने वाली साबित हो सकती है.

बच्चों के लिए नया पाठ्यक्रम

AI पाठ्यक्रम केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगा. इसमें कोडिंग, रोबोटिक्स, डेटा एनालिसिस, नैतिकता और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) जैसे विषय शामिल होंगे. छात्र न सिर्फ पढ़ेंगे बल्कि प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट बनाकर भी सीखेंगे. सरकार ने साफ कर दिया है कि अब शिक्षा का मकसद केवल नौकरी ढूंढना नहीं, बल्कि नौकरी बनाना होगा. बच्चों को हैकाथॉन, कोडिंग प्रतियोगिताएं और विज्ञान मेले जैसे आयोजनों का हिस्सा बनाया जाएगा. यह सब सामग्री अंग्रेजी और पंजाबी दोनों भाषाओं में उपलब्ध होगी, ताकि हर बच्चा आसानी से इसका लाभ उठा सके.

शिक्षक भी हो रहे हैं डिजिटल क्रांति के लिए तैयार

सिर्फ बच्चों पर ध्यान देने के बजाय सरकार ने शिक्षकों को भी इस बदलाव का केंद्र बनाया है. 10,000 से अधिक शिक्षकों को एक खास ट्रेनिंग प्रोग्राम से तैयार किया जा रहा है, जिसमें ऑनलाइन मॉड्यूल और वर्कशॉप दोनों शामिल हैं. उन्हें प्रोजेक्ट-आधारित पढ़ाई और सवाल-जवाब केंद्रित पद्धति सिखाई जाएगी. इससे कक्षा का माहौल बदल जाएगा और छात्र सक्रिय रूप से सीखने में शामिल होंगे. हर शिक्षक को ट्रेनिंग के बाद प्रमाणपत्र मिलेगा और समय-समय पर नए रिवाइज़र कोर्स भी कराए जाएंगे ताकि वे AI की तेज़ रफ्तार दुनिया से पीछे न रह जाएं.

पंजाब का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर देश में सबसे आगे

पंजाब में इस पहल को मजबूत बनाने के लिए पहले से ही बेहतरीन डिजिटल सिस्टम मौजूद है. राज्य के 19,243 सरकारी स्कूलों में से 18,391 स्कूलों में कंप्यूटर उपलब्ध हैं, जो 95.6% कवरेज दिखाता है. तुलना में हरियाणा में यह आंकड़ा केवल 31.9% और हिमाचल प्रदेश में 34.2% है. लगभग 17,150 स्कूल स्मार्ट क्लासरूम से लैस हैं, जहां डिजिटल बोर्ड, स्मार्ट टीवी और वर्चुअल क्लासरूम की सुविधा है. यहां तक कि लैपटॉप की उपलब्धता भी 9.8% है, जो हरियाणा (2.1%) और हिमाचल (1.9%) से कहीं अधिक है. यह मजबूत डिजिटल आधार सुनिश्चित करता है कि पंजाब के छात्र आसानी से AI शिक्षा को अपनाएं.

प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट-आधारित शिक्षा

पंजाब सरकार ने घोषणा की है कि इस योजना को अगले तीन सालों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. चुने गए स्कूलों में बच्चों को किताबों की बजाय प्रोजेक्ट बनाकर पढ़ाया जाएगा. उन्हें LMS (लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम), डिजिटल प्लेटफॉर्म और ज़रूरी सॉफ़्टवेयर उपलब्ध कराए जाएंगे. इस मॉडल से बच्चों में समस्या सुलझाने और नई सोच विकसित करने की क्षमता बढ़ेगी.

नौकरी चाहने वाले नहीं, नौकरी देने वाले युवा

मुख्यमंत्री मान ने साफ किया है कि इस पहल का मकसद युवाओं को केवल तकनीक सिखाना नहीं बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है. सरकार चाहती है कि छात्र आलोचनात्मक सोच और रचनात्मकता को अपनाएं, ताकि वे केवल नौकरी ढूंढने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनें. यह कदम पंजाब को न सिर्फ शिक्षा में बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास में भी देशभर में अग्रणी बना सकता है.