चंडीगढ़: पंजाब की राजनीति में कांग्रेस की दलित-विरोधी मानसिकता एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के लगातार आ रहे अपमानजनक बयानों ने दलित समाज में भारी रोष पैदा कर दिया है. आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करते हुए कड़ा रुख अपनाया है. AAP ने कांग्रेस को 24 घंटे के भीतर सार्वजनिक माफी मांगने का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन चुप्पी बनाए रखने पर AAP कार्यकर्ताओं ने चंडीगढ़ में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया.
विरोध प्रदर्शन के दौरान AAP नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बैंड-बाजा लेकर सड़कों पर उतरकर संदेश दिया कि दलित समाज के सम्मान से अब कोई खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, लेकिन AAP का आंदोलन जारी रहा. पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “कांग्रेस नेताओं ने न सिर्फ कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ का अपमान किया, बल्कि उनके काम, उनकी कम्युनिटी और पूरे दलित भाईचारे का मजाक उड़ाया है.”
मुख्य विवाद पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के बयान से शुरू हुआ, जिन्होंने दलित कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ को “गर्दन मरोड़ने” की धमकी दी. वहीं विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने हरभजन सिंह पर तंज कसते हुए कहा कि वे “पहले बैंड बजाते थे”. AAP का कहना है कि यह टिप्पणी सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे दलित समाज की पहचान और मेहनत का अपमान है.यह पहला मौका नहीं है. पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने खुद पार्टी की बैठक में स्वीकार किया था कि पंजाब में दलितों की आबादी 35-38 प्रतिशत होने के बावजूद कांग्रेस के शीर्ष पदों पर “ऊंची जाति” के लोग काबिज हैं. चन्नी का सवाल था, “हमें उचित प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिल रहा? हम कहां जाएंगे?” यह कांग्रेस के भीतर दलित नेताओं की घुटन का खुला कबूलनामा था.
वहीं AAP सरकार में कैबिनेट के 6 मंत्री दलित समाज से हैं, जो दलितों को सम्मानजनक प्रतिनिधित्व और निर्णय प्रक्रिया में हिस्सेदारी दे रही है. AAP के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने सोशल मीडिया पर लिखा, “कांग्रेस की सोच ही दलित-विरोधी है. राजा वडिंग और राहुल गांधी को दलित समाज से तुरंत माफी मांगनी चाहिए.”राजा वडिंग का पुराना रिकॉर्ड भी विवादास्पद रहा है. उन्होंने पूर्व गृह मंत्री स्व. बूटा सिंह पर नस्लवादी टिप्पणी की थी – “नाम सुणेया बूटा सिंह दा, काला रंग हुंदा सी, जमा काला”. दलित समाज इसे आज भी याद रखता है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की बार-बार दलित अपमान करने वाली नीति और AAP की समावेशी राजनीति के कारण दलित समाज का रुझान 2022 की तरह 2027 में भी AAP की ओर और मजबूत होगा. दलित समाज का स्पष्ट संदेश है – अपमान नहीं, सम्मान चाहिए. और यह सम्मान उन्हें आज AAP में मिल रहा है.