नई दिल्ली: दिल्ली में कृत्रिम बारिश की उम्मीद पर फिलहाल पानी फिर गया है. आईआईटी कानपुर की टीम द्वारा मंगलवार को किया गया क्लाउड सीडिंग ट्रायल कोई बड़ा असर नहीं दिखा पाया.
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि यह प्रयोग बेहद कम नमी वाले वातावरण में किया गया था, ताकि जांच की जा सके कि क्या इतनी कम नमी में भी क्लाउड सीडिंग संभव है. सरकार अब आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है.
सिरसा ने बताया कि आम तौर पर क्लाउड सीडिंग के लिए 50% से अधिक नमी जरूरी होती है, लेकिन इस बार यह प्रयोग मात्र 10–15% नमी में किया गया. उन्होंने कहा 'आईआईटी कानपुर को इस पर भरोसा था, इसलिए हमने अनुमति दी.' मंत्री ने बताया कि अभी रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद ही यह तय होगा कि बारिश हुई या नहीं. उन्होंने माना कि कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी हो सकती है.
मंगलवार को सीसेना विमान की मदद से दूसरा क्लाउड सीडिंग ट्रायल किया गया. विमान मेरठ की दिशा से दिल्ली में दाखिल हुआ और खेकरा, बुराड़ी, नॉर्थ करोल बाग व मयूर विहार जैसे इलाकों में फ्लेयर छोड़े. सिरसा ने बताया कि आठ फ्लेयर का इस्तेमाल किया गया, जिनका वजन करीब 2 से 2.5 किलो था और प्रत्येक फ्लेयर 2–2.5 मिनट तक चला. पूरी प्रक्रिया लगभग आधे घंटे तक चली.
मंत्री ने बताया कि आईआईटी कानपुर की जानकारी के अनुसार, क्लाउड सीडिंग के बाद बारिश 15 मिनट से 4 घंटे के भीतर हो सकती है. सिरसा ने कहा 'जहां क्लाउड सीडिंग हुई है, वहां वही बारिश देखी जाएगी.' उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में 9 से 10 और ट्रायल किए जाएंगे, जिनमें मुख्य रूप से उत्तरी दिल्ली और आसपास के इलाकों को लक्ष्य बनाया जाएगा.
सिरसा ने कहा कि यह पहल सरकार की एक बड़ी वैज्ञानिक कोशिश है, जो प्रदूषण से निपटने की दिशा में एक नया अध्याय खोलेगी. उन्होंने कहा कि यह पहल फरवरी तक जारी रह सकती है. दिल्ली सरकार ने आईआईटी कानपुर के साथ 25 सितंबर को एक समझौता किया था, जिसके तहत पांच ट्रायल किए जाने हैं. इसका उद्देश्य कृत्रिम बारिश से वायु प्रदूषण के स्तर को कम करना है.
डीजीसीए से अनुमति मिलने के बाद अक्टूबर-नवंबर के बीच इन ट्रायल्स को अंजाम दिया जा रहा है. पहले मौसम प्रतिकूल होने की वजह से कई बार इसे टालना पड़ा था. सिरसा ने कहा कि पिछली सरकार की तरह केवल पाबंदियां लगाने के बजाय यह सरकार समाधान खोजने पर काम कर रही है. उनका कहना है कि अगर यह सफल रहा तो भविष्य में इसे स्थायी रूप से लागू किया जा सकता है.