नई दिल्ली: जहरीली धुंध और प्रदुषण से निपटने के लिए, मंगलवार को दिल्ली के कई इलाकों में क्लाउड सीडिंग करवाई की गई. अब इससे उम्मीद जगी है कि कृत्रिम बारिश जल्द ही राजधानी की जहरीली हवा को धो देगी.
यह अभियान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के एक विमान द्वारा चलाया गया, जिसमें बारिश शुरू करने के लिए डिजाइन किए गए विशेष नमक-आधारित और सिल्वर आयोडाइड फ्लेयर्स थे. यह अभ्यास दोपहर 12:30 बजे होना था, लेकिन कम दृश्यता के कारण इसमें देरी हुई.
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि अगर क्लाउड सीडिंग के जरिए कृत्रिम बारिश सफल रही, तो इससे वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने में काफी मदद मिल सकती है. उन्होंने कहा कि बारिश 15 मिनट के अंदर हो सकती है या इसमें 4 घंटे तक लग सकते हैं.
सिरसा ने बताया कि खेकड़ा, बुराड़ी, मयूर विहार और कई अन्य इलाकों में क्लाउड सीडिंग की गई. आठ फ्लेयर्स का इस्तेमाल किया गया और पूरी प्रक्रिया लगभग आधे घंटे तक चली. दूसरा और तीसरा परीक्षण भी आज होगा.
#WATCH | Delhi Minister Manjinder Singh Sirsa says, "The second trial of cloud seeding has been done in Delhi. This was done by IIT Kanpur through Cessna Aircraft. The aircraft entered Delhi from the direction of Meerut. Khekra, Burari, North Karol Bagh, Mayur Vihar were covered… pic.twitter.com/h41NBQ8CEI
— ANI (@ANI) October 28, 2025
मंगलवार का क्लाउड सीडिंग परीक्षण पिछले हफ्ते उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी के ऊपर एक परीक्षण उड़ान के बाद हुआ है, जिसके दौरान सिल्वर आयोडाइड और सोडियम क्लोराइड की थोड़ी मात्रा छोड़ी गई थी. हालांकि, नमी के कम स्तर (आवश्यक 50 प्रतिशत की तुलना में 20 प्रतिशत से कम) के कारण बारिश नहीं हो पाई.
क्लाउड सीडिंग परियोजना को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग से अंतिम मंज़ूरी मिल गई है, जो राष्ट्रीय राजधानी में कृत्रिम वर्षा कराने का पहला पूर्ण प्रयास है.
यह प्रयास दिवाली के बाद वायु प्रदूषण में एक और खतरनाक वृद्धि और सर्दियों की शुरुआत के बीच पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं में वृद्धि के बीच किया जा रहा है.
अधिकारियों ने बताया कि क्लाउड सीडिंग परीक्षण व्यापक शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण रणनीति का हिस्सा हैं और इन्हें चरणबद्ध तरीके से चलाया जाएगा. दिल्ली कैबिनेट ने इस साल मई में कुल 3.21 करोड़ रुपये की लागत से ऐसे पाँच परीक्षणों को मंज़ूरी दी थी.