नई दिल्ली: मौजूदा समय में अगर किसी भारतीय खिलाड़ी की सबसे ज्यादा बात हो रही है तो वह खिलाड़ी कोई और नहीं बल्कि दाएं हाथ के बल्लेहबाज श्रेयस अय्यर हैं. श्रेयस दिन प्रतिदिन अपने गेम में और परिपक्व होते जा रहे हैं. पिछले कुछ आईपीएल से श्रेयस न केवल कप्तानी में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं बल्कि अपने बल्ले से भी आग उगल रहे हैं.
इतना ही नहीं बल्कि वह अपनी टीम के लिए फिनिशर का भी काम कर रहे हैं. लेकिन अब अय्यर ने अपनी इस आत्मविश्वासी बल्लेबाजी का राज खोला है. उन्होंने बताया कि एक समय में कैसे उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ता था लेकिन अय्यर ने हार नहीं मानी और उन आलोचनाओं को अपनी प्रेरणा बनाकर काम करना शुरु किया.
श्रेयस अय्यर ने एक कार्यक्रम में बताया कि एक समय था जब शॉर्ट बॉल उनकी कमजोरी हुआ करती थी, लेकिन आज अय्यर अपनी उसी कमजोरी को अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदल चुके हैं. लेकिन कुछ ही ऐसे होते हैं जो आलोचनाओं को अपनी ताकत बना लेते हैं. Shreyas Iyer उन्हीं नामों में शामिल हैं. अय्यर को बाउंसरों के खिलाफ अपनी कथित कमजोरी के लिए कभी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा.
अय्यर ने बताया कि उन्हें यह सुनना बिल्कुल पसंद नहीं था कि वे कुछ खास परिस्थितियों में सफल नहीं हो सकते. उन्होंने कहा कि, 'मेरे आस-पास ऐसे लोग हैं जो कहते हैं कि कुछ परिस्थितियों में तुम यह नहीं कर सकते, यह नामुमकिन है. मुझे यह सुनना अच्छा नहीं लगता था. तब मैंने मन ही मन ठान लिया कि मैं उन सभी को गलत साबित करुंगा.' यही बाते मेरे लिए प्रेरणा बनी और उन्होंने खुद को लगातार बेहतर करना शुरु किया.
'शॉर्ट बॉल की कमजोरी’ का टैग अय्यर को लंबे समय तक परेशान करता रहा. लेकिन उन्होंने इसे चुनौती के रूप में लिया और जमकर मेहनत की. अब अगर उन्हें अपने जोन में शॉर्ट गेंद मिलती है, तो वह उसे बड़े शॉट में बदलने से नहीं चूकते. वह उस गेंद को अपने तरीके से खेलने को देखते हैं.
मेहनत करने के बाद भी अय्यर की राह आसान नहीं रही. वह लगातार चोट का शिकार होते रहे, जिस कारण भी उनकी योग्यता पर सवाल खड़े हो रहे थे. पीठ की चोट के बाद भी अय्यर को लेकर संदेह जताए गए थे, लेकिन उनका मानना है कि खिलाड़ी की असली परीक्षा उसकी मानसिकता होती है आप क्या सुनते हैं और किसे नजरअंदाज करते हैं, यही आपको आगे बढ़ाता है.