डबल ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर से सूर्यवंशी के बारे में पूछा गया सवाल, सोशल मीडिया पर मचा बवाल

हाल ही में दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भारक से युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर कुछ सवाल पूछे गए. जिसके बाद से सोशल मीडिया पर एक बहस सी छिड़ गई है.

ANI & X (@mufaddal_vohra)
Meenu Singh

नई दिल्ली: भारत में खेलों को लेकर जुनून की कोई कमी नहीं है, लेकिन यह जुनून अक्सर एक ही खेल तक सीमित रह जाता है, वह है क्रिकेट. भारत में क्रिकेट को भगवान माना जाता है. देश में क्रिकेट को केवल खेल नहीं बल्कि त्योहार की तरह सेलिब्रेट किया जाता है. लेकिन इस कारण देश में बाकी खेलों का नजरअंदाज किया जाता है. जिस पर अक्सर ही बहस छिड़ जाती है. 

अब इस पर हाल ही में दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भारक से युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर कुछ सवाल पूछे गए. जिसके बाद से सोशल मीडिया पर एक बहस सी छिड़ गई है. यह घटना केवल एक विवाद नहीं, बल्कि भारत की खेल सोच का आईना बन गई है.

खेल नहीं क्रिकेट प्रिय है भारत

भले ही देश में खेल को आगे बढ़ाने की और ज्यादा से ज्यादा बच्चों को खेल में आगे आने की बात कही जाती है. यह तब तक संभव नहीं है जब तक मीडिया और फैंस केवल क्रिकेट को ही खेल समझना बंद न करें. 

ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि दिल्ली में भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ की 75वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम के दौरान पूछे गए सवाल इस चर्चा को और तेज कर दिया है. दरअसल भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ की वर्षगांठ के दौरान चर्चा का केंद्र निशानेबाजी से हटकर क्रिकेट बन गया. यह तब और हैरान करने वाला है, जब भाकर खुद विश्व स्तर पर देश का नाम रोशन कर चुकी हैं. उनकी मौजूदगी में उनसे क्रिकेट के सवाल किए जा रहे हैं. 

क्रिकेट का अत्यधिक प्रभाव

भारत में IPL और क्रिकेट का प्रभाव इतना अधिक है कि अन्य खेल अक्सर उसकी छाया में दब जाते हैं. भले ही कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल करे, लेकिन सुर्खियों में आने के लिए क्रिकेट से जुड़ाव जैसे जरूरी हो जाता है.

मनु भाकर की उपलब्धियां

बता दें मनु भाकर ने कम उम्र में ही वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई. उन्होंने 16 साल की उम्र में विश्व कप में स्वर्ण पदक जीता और बाद में ओलंपिक में भी देश के लिए पदक हासिल किए. इसके बावजूद, उनके अपने खेल की बजाय उनसे क्रिकेट से जुड़े सवाल पूछे जाना एक असंतुलन को दर्शाता है.

एकतरफा खेल संस्कृति

यह घटना दिखाती है कि भारत में खेलों को लेकर जिज्ञासा और चर्चा एकतरफा है. जब तक कोई खिलाड़ी क्रिकेट से जुड़ा न हो, उसे वह महत्व नहीं मिलता जो उसे मिलना चाहिए. यही वजह है कि अन्य खेलों के सितारे अक्सर सीमित समय के लिए ही चर्चा में रहते हैं. 

लेकिन अगर भारत को एक खेल राष्ट्र बनना है तो सोच में बदलाव जरूरी है. सिर्फ पदक जीतना ही काफी नहीं, बल्कि हर खेल और उसके खिलाड़ियों को बराबर सम्मान देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.