नई दिल्ली: नेपाल के हिमालयी क्षेत्र सिर्फ खूबसूरत नजारे और ऊंची चोटियों के लिए ही मशहूर नहीं हैं. यहां के घने जंगलों में छिपा है स्वाद और सेहत का अनमोल खजाना. ये दुर्लभ जंगली फल स्थानीय लोगों की परंपरा और दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं. आइए जानते हैं इन पांच खास फलों के बारे में जो बाजार में कम मिलते हैं लेकिन फायदों से भरपूर हैं.
चिउरी हिमालय के निचले इलाकों में पाया जाने वाला पेड़ है. जो स्वाद और सेहत दोनों में एक नंबर. इसका हल्का पीला फल मीठा गूदा वाला होता है. सबसे खास इसकी बीजों से निकलने वाला घी है, जो खाना पकाने, दीप जलाने और त्वचा पर लगाने के काम आता है. कुछ समुदायों में इसे दहेज में भी दिया जाता है. जिसके बारे में बहुत कम लोग ही जाते हैं.
किम्बू पहाड़ी ढलानों पर गुच्छों में उगता है. पकने पर इसका रंग बदलता है और स्वाद हल्का खट्टा-मीठा होता है. गर्मियों में यह बहुत पसंद किया जाता है. इसका रस गले की खराश और पाचन संबंधी समस्याओं में आराम पहुंचाता है.
चुट्रो छोटे बैंगनी रंग के बेरी जैसे फल हैं. इसमें विटामिन C प्रचुर मात्रा में होता है. आयुर्वेद में इसकी जड़ और छाल से तैयार रसौत का इस्तेमाल आंखों की रोशनी और त्वचा की समस्याओं के लिए किया जाता है.
ऐसेलू अपने सुनहरे रंग और शहद जैसे मीठे स्वाद के लिए प्रसिद्ध है. यहां लोग इसे बहुत पसंद करते हैं. यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है और ट्रैकिंग के दौरान नैचुरल एनर्जी बूस्टर का काम करता है. स्थानीय लोग अब इसका जैम और वाइन भी बनाते हैं.
काफल को जंगली फलों का राजा कहा जाता है. यह छोटा लाल फल मीठा और हल्का खट्टा होता है. जंगलों में खुद उगता है और बहुत कम समय के लिए उपलब्ध रहता है. सिरदर्द, बुखार और पाचन की समस्या में यह फायदेमंद साबित होता है. ये सभी फल सिर्फ खाने तक सीमित नहीं बल्कि नेपाल की संस्कृति और प्रकृति से गहरा जुड़ाव रखते हैं