menu-icon
India Daily

2,000 कमांडोज, क्यूबा एजेंट, बंकर और हर रात बदलता बिस्तर; फिर कैसे अमेरिकी ऑपरेशन में फंसे मादुरो?

काराकस में अमेरिकी कार्रवाई ने वेनेजुएला की सत्ता संरचना को हिला दिया. मिराफ्लोरेस पैलेस और गुप्त बंकर बेअसर साबित हुए. बिना गोली चले मादुरो की गिरफ्तारी ने सुरक्षा तंत्र, वफादारी और अंदरूनी टूट पर बड़े सवाल खड़े किए.

Kanhaiya Kumar Jha
2,000 कमांडोज, क्यूबा एजेंट, बंकर और हर रात बदलता बिस्तर; फिर कैसे अमेरिकी ऑपरेशन में फंसे मादुरो?
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: वेनेजुएला की राजधानी काराकस में राष्ट्रपति भवन मिराफ्लोरेस पैलेस और गुप्त बंकर, जिन्हें सबसे सुरक्षित माना जाता था, अचानक वीरान हो गए. अमेरिकी बलों ने निकोलस मादुरो को उनके निजी कक्ष से बाहर निकाला. हैरानी यह रही कि 24 घंटे तैनात बताए जाने वाले 2,000 से अधिक एलीट कमांडो के बावजूद एक भी गोली नहीं चली. इस घटना ने मादुरो की सुरक्षा व्यवस्था और सत्ता की जड़ों को कठघरे में खड़ा कर दिया.

मादुरो की सुरक्षा आम राष्ट्राध्यक्षों जैसी नहीं थी. गार्डिया डी ऑनर प्रेसिडेंशियल के जिम्मे उनकी हर सांस थी. सेना, वायुसेना और नौसेना से चुने गए एलीट कमांडो दिन-रात तैनात रहते थे. दावा था कि बेडरूम तक हवा भी जांच के बाद पहुंचती है. लेकिन अमेरिकी कार्रवाई ने दिखा दिया कि कागजी अभेद्यता असल संकट में टिक नहीं पाती.

तीन सुरक्षा घेरों की हकीकत

आउटर रिंग में मिलिट्री पुलिस और नेशनल गार्ड बाहरी गतिविधियों को दूर ही रोकते थे. मिडल रिंग में स्नाइपर्स, बम निरोधक दस्ते और एंटी-ड्रोन सिस्टम थे. इनर रिंग मादुरो का निजी घेरा था, जहां स्थानीय सैनिकों से ज्यादा क्यूबा की खुफिया एजेंसी के एजेंट मौजूद रहते थे. इतने इंतजामों के बावजूद निर्णायक क्षण में तंत्र निष्क्रिय दिखा.

डर में जीता राष्ट्रपति

अमेरिकी एजेंसियों से बचने के लिए मादुरो अत्यधिक सतर्क रहते थे. वे लगातार एक ही बिस्तर पर नहीं सोते थे और सुरक्षित घरों व अंडरग्राउंड बंकरों में रात गुजारते थे. स्मार्टफोन छोड़कर वे बर्नर फोन इस्तेमाल करते थे. ट्रैकिंग का भय उनकी दिनचर्या तय करता था. इसके बाद भी उनकी लोकेशन तक पहुंच बनना सुरक्षा पर बड़ा प्रश्न है.

अंदरूनी सेंध के संकेत

सामरिक विशेषज्ञों के मुताबिक बिना प्रतिरोध गिरफ्तारी इस ओर इशारा करती है कि सुरक्षा तंत्र भीतर से कमजोर हो चुका था. आशंका है कि करीबी जनरलों ने सौदा किया या सेना खुद मादुरो से दूरी बना चुकी थी. पहरेदारों का मूकदर्शक बने रहना आदेश या सहमति का संकेत माना जा रहा है.

क्यूबा कवच और तकनीक की हार

इनर सर्कल में मौजूद क्यूबा एजेंट भी निर्णायक भूमिका नहीं निभा सके. रिपोर्ट्स के अनुसार वे या तो निष्क्रिय कर दिए गए या हथियार डालने को मजबूर हुए. साथ ही उन्नत तकनीक से रडार और संचार बाधित होने की संभावना जताई गई है. नतीजा यह कि बंदूकें तनी रहीं और खेल खत्म हो गया. यह घटना दुनिया भर के सत्ताधीशों के लिए सख्त चेतावनी बन गई है.