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ईरान में जारी सत्ता संघर्ष के बीच ट्रंप ने दिया खास ऑफर, क्या सीजफायर पर बनेगी बात?

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ तनाव कम करने के लिए तीन से पांच दिन के सीमित युद्धविराम का प्रस्ताव दिया है. हालांकि, तेहरान के भीतर मोजतबा खामेनेई, सैन्य जनरलों और नागरिक वार्ताकारों के बीच सत्ता संघर्ष ने शांति वार्ता को अधर में लटका दिया है.

KanhaiyaaZee
ईरान में जारी सत्ता संघर्ष के बीच ट्रंप ने दिया खास ऑफर, क्या सीजफायर पर बनेगी बात?
Courtesy: Social Media

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की लपटें शांत करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं. वाशिंगटन को उम्मीद है कि बचे हुए परमाणु मुद्दों पर अब भी समझौता संभव है, जिसके लिए ईरान को अपनी स्थिति संभालने हेतु सीमित समय के लिए एक युद्धविराम दिया जा रहा है. हालांकि, तेहरान के भीतर राजनीतिक और सैन्य गुटों के बीच छिड़ी वर्चस्व की जंग इन प्रयासों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है.

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने ईरान को तीन से पांच दिन का एक संक्षिप्त सीजफायर प्रस्तावित किया है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वाशिंगटन का मानना है कि कूटनीतिक रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है. हालांकि, अमेरिकी पक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि यह युद्धविराम अनिश्चितकालीन नहीं होगा. इसका उद्देश्य ईरानी नेतृत्व को अपने भीतर शांति के लिए आम सहमति बनाने का एक अंतिम मौका देना है. तेहरान में नेतृत्व का बिखराव शांति वार्ता में सबसे बड़ी बाधा ईरान के भीतर सत्ता का बिखरा हुआ संतुलन बनी हुई है.

अमेरिकी अधिकारियों को चिंता है कि तेहरान में कोई ऐसा स्पष्ट और मजबूत नेतृत्व नहीं है जो किसी अंतिम निर्णय को आधिकारिक मंजूरी दे सके. मोजतबा खामेनेई वर्तमान में बहुत सीमित स्तर पर संवाद कर रहे हैं, जिससे सत्ता के गलियारों में अनिश्चितता का माहौल है. इस राजनीतिक शून्य के कारण शांति की दिशा में कोई ठोस फैसला लेना जटिल होता जा रहा है.

सेना और वार्ताकारों के बीच गहरी दरार 

ईरान के भीतर नागरिक वार्ताकारों और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के जनरलों के बीच रणनीति को लेकर खुलेआम मतभेद सामने आ रहे हैं. अमेरिकी अधिकारियों ने इस दरार को पहली बार इस्लामाबाद वार्ता के पहले दौर के बाद महसूस किया था. वार्ताकार जहां कूटनीति के पक्ष में हैं, वहीं सैन्य अधिकारी उनकी चर्चाओं को लगातार खारिज कर रहे हैं. दोनों ही पक्षों की पहुंच देश के सर्वोच्च नेतृत्व तक नहीं हो पा रही है.

होर्मुज जलडमरूमध्य पर खींचतान 

सत्ता संघर्ष का सबसे बड़ा उदाहरण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी विवाद है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से खोलने की घोषणा की थी. लेकिन IRGC ने तुरंत इस आदेश को लागू करने से इनकार कर दिया और मंत्री की सार्वजनिक आलोचना शुरू कर दी. इस घटना ने साबित कर दिया कि ईरानी प्रशासन के भीतर सेना का प्रभाव नागरिक सरकार से कहीं अधिक प्रभावी और स्वतंत्र है.

अनिश्चितता के घेरे में दूसरे दौर की वार्ता 

फिलहाल ईरान ने अमेरिका के नए युद्धविराम प्रस्ताव पर कोई सकारात्मक या ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है. साथ ही, पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता के दूसरे दौर में शामिल होने को लेकर भी तेहरान की ओर से कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई गई है. जनरल अहमद वाहिदी जैसे कट्टरपंथी नेताओं का बढ़ता प्रभाव शांति की राह में बड़ा रोड़ा माना जा रहा है. दुनिया की नजरें अब ईरान के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं.