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अमेरिका की एक नहीं चली! 121 देशों के समर्थन से ईरान को यूएन में मिला अहम पद, क्या युद्ध की हवा बदलेगी?

संयुक्त राष्ट्र में नॉन प्रोलिफरेशन ट्रीटी (NPT) की समीक्षा बैठक शुरू हुई. अमेरिका के जोरदार विरोध के बावजूद ईरान को 121 देशों के समर्थन से उपाध्यक्ष पद मिल गया. बैठक में 34 उपाध्यक्ष चुने गए, जिसमें ईरान भी शामिल है. अमेरिका ने इसे अपमान बताया, जबकि ईरान ने अमेरिका पर परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
अमेरिका की एक नहीं चली! 121 देशों के समर्थन से ईरान को यूएन में मिला अहम पद, क्या युद्ध की हवा बदलेगी?
Courtesy: social media

नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र संघ में परमाणु नॉन प्रोलिफरेशन ट्रीटी (NPT) की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक शुरू हो गई है, लेकिन शुरुआत से ही विवाद छाया रहा. अमेरिका ने ईरान को उपाध्यक्ष पद दिए जाने का जमकर विरोध किया, पर उसकी एक नहीं चली. गुट निरपेक्ष देशों के मजबूत समर्थन से ईरान को यह पद मिल गया. एक महीने तक चलने वाली इस बैठक में परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग पर चर्चा होगी. अमेरिका और ईरान के बीच तीखी बहस ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है.

121 देशों के समर्थन से ईरान को मिला पद

परमाणु अप्रसार संधि यानी NPT की बैठक में 34 उपाध्यक्ष चुने गए हैं. इनमें ईरान का नाम भी शामिल है. गुट निरपेक्ष आंदोलन के 121 देशों ने ईरान का समर्थन किया, जिसके कारण अमेरिका का विरोध बेकार साबित हुआ. बैठक की अध्यक्षता वियतनाम को सौंपी गई है. ईरान का कहना है कि वह परमाणु हथियारों का विरोध करता रहा है और अमेरिका दुनिया भर में उसके खिलाफ झूठी अफवाहें फैला रहा है. 

अमेरिका ने किया जमकर विरोध

अमेरिका ने आखिरी समय तक ईरान के नाम का विरोध किया, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली. अमेरिकी शस्त्र नियंत्रण और अप्रसार ब्यूरो के सहायक सचिव क्रिस्टोफर येव ने इसे NPT के लिए अपमान और शर्मनाक फैसला बताया. उन्होंने कहा कि ईरान लंबे समय से संधि की नियमों को नजरअंदाज कर रहा है. फिर भी 121 देशों के समर्थन ने अमेरिका को अलग-थलग कर दिया.

ईरान का पलटवार

ईरान की अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी में दूत रजा नजाफी ने अमेरिका की आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि अमेरिका एकमात्र देश है जिसने परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया है. उन्होंने अमेरिका पर अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार करने का आरोप लगाया और कहा कि उसे इस मुद्दे पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. ईरान ने अमेरिका की नियत पर सवाल उठाए.

एनपीटी क्या है?

परमाणु अप्रसार संधि (NPT) 1970 में शीतयुद्ध के दौरान बनाई गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया को परमाणु हमलों से बचाना है. इसमें 190 से ज्यादा देश सदस्य हैं. संधि के तीन प्रमुख लक्ष्य हैं- परमाणु हथियार न रखने वाले देश इसे हासिल न करें, परमाणु हथियार रखने वाले देश इसे कम करें और परमाणु ऊर्जा का उपयोग केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों जैसे बिजली उत्पादन के लिए हो. यह बैठक हर पांच साल में होती है.