नई दिल्ली: दुनिया भर के राजनयिकों की निगाहें अब पाकिस्तान की ओर टिकी हैं, जहां दशकों पुराने प्रतिद्वंद्वी अमेरिका और ईरान के बीच शांति की नई पटकथा लिखी जा सकती है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस नाजुक जिम्मेदारी के लिए अपने दो सबसे भरोसेमंद सहयोगियों, स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर को मैदान में उतारा है. यह वार्ता एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर हो रही है, जहां मध्य पूर्व में सैन्य संघर्ष और आर्थिक प्रतिबंधों ने पूरे वैश्विक बाजार को अस्थिर कर रखा है.
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर जल्द ही पाकिस्तान की जमीन पर उतरेंगे. फिलहाल उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस यात्रा का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन चर्चा में प्रगति होने पर उनके शामिल होने की संभावना बनी हुई है. इन दूतों का मुख्य कार्य ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची के साथ सीधे संवाद के जरिए संघर्ष को खत्म करना है. पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ बनकर उभरा है, जिससे इस द्विपक्षीय वार्ता के दूसरे दौर की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने पहले पाकिस्तान जाने की घोषणा की थी, जिससे यह संकेत मिला था कि ईरान शांति वार्ता के लिए गंभीर है. हालांकि, उनकी हालिया सोशल मीडिया पोस्ट ने कूटनीतिक हलकों में थोड़ी हलचल मचा दी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी यात्रा द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर परामर्श के लिए है. इसके बावजूद, अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि अरागची और ट्रंप के दूतों के बीच होने वाली यह बैठक युद्ध के अंत की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है
शांति की कोशिशों के साथ-साथ राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर कड़ा सैन्य और आर्थिक दबाव भी बनाया हुआ है. उन्होंने अमेरिकी नौसेना को आदेश दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर सीधे कार्रवाई की जाए. इसी क्रम में अमेरिकी सेना ने दो बड़े तेल सुपरटैंकरों को रोक लिया है, जो ईरानी बंदरगाहों से तेल निर्यात करने की कोशिश कर रहे थे. ट्रंप की यह 'मैक्सिमम प्रेशर' रणनीति ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर कर उसे शांति समझौते के लिए मजबूर करने का हिस्सा है
पाकिस्तानी अधिकारी इस वार्ता को लेकर बहुत सकारात्मक हैं और उन्हें उम्मीद है कि यह वार्ता मध्य पूर्व में स्थिरता लाएगी. यह घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब इजरायल और लेबनान के बीच भी युद्धविराम को तीन सप्ताह के लिए बढ़ाने पर सहमति बन गई है. अमेरिका की ओर से ईरान पर बढ़ रहे दबाव और साथ में चल रही इन कूटनीतिक वार्ताओं ने क्षेत्रीय शक्तियों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है. अब सभी की नजरें इस पर हैं कि पाकिस्तान की मेज पर होने वाली यह चर्चा क्या रंग लाती है
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर स्पष्ट कर दिया है कि वह समझौते के लिए लंबा इंतजार नहीं करेंगे. उन्होंने लिखा कि उनके पास समय की कोई कमी नहीं है, लेकिन ईरान के पास विकल्प खत्म होते जा रहे हैं. तेल निर्यात पर रोक लगाकर और नौसैनिक नाकेबंदी तेज करके अमेरिका ने अपनी शर्तें तय कर दी हैं. अब गेंद ईरान के पाले में है कि वह आर्थिक बर्बादी चुनता है या कुशनर और विटकॉफ के साथ बैठकर शांति की नई राह तलाशता है.