डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले से पाकिस्तान काफी गदगद है. ट्रंप ने पाकिस्तान को F-16 विमानों के लिए पहले से रोकी गई 5.3 बिलियन डॉलर की राशि जारी की है. हालांकि अमेरिका ने कुछ शर्तों के साथ पाकिस्तान को यह राशि दी है. अगर पाकिस्तान शर्तों को तोड़ता है तो वह मुश्किल में पड़ सकता है.
अमेरिका और पाकिस्तान के बीच सुरक्षा सहायता को लेकर कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं, जिनमें विशेष रूप से पाकिस्तान के F-16 विमानों की देखरेख के लिए अमेरिका द्वारा दिए गए 397 मिलियन डॉलर की सहायता पर ध्यान आकर्षित किया गया है. यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 2018 में लिए गए निर्णय से एक पलटाव का प्रतीक है, जब उन्होंने पाकिस्तान को दी जाने वाली सुरक्षा सहायता को रोक दिया था.
अमेरिका ने विदेशी सहायता पर रोक से पाकिस्तान के F-16 विमानों को छूट दी
ट्रंप प्रशासन ने पहले से रोकी गई 5.3 बिलियन डॉलर की राशि जारी की है। यह ज्यादातर सुरक्षा और मादक द्रव्य विरोधी कार्यक्रमों के लिए है। आवंटन में पाकिस्तान में एक कार्यक्रम के लिए 397 मिलियन डॉलर शामिल हैं,… pic.twitter.com/5Bwbb5HqbR— RT Hindi (@RT_hindi_) February 26, 2025Also Read
F-16 विमानों का महत्व और इससे जुड़ा विवाद
पाकिस्तान ने 1980 और 1990 के दशक में अमेरिका से F-16 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति की थी. इन विमानों का उपयोग मुख्य रूप से आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए किया जाना था लेकिन, बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद, पाकिस्तान के द्वारा इन विमानों का उपयोग भारत के खिलाफ किया गया था, जो कि अमेरिका के साथ किए गए समझौते का उल्लंघन था. भारत ने इसे लेकर गंभीर आपत्ति जताई थी और यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया गया था.
ट्रंप प्रशासन द्वारा सहायता में कटौती
भारत पर हमले के लिए इस्तेमाल के बाद 2018 में, ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान को दी जाने वाली सुरक्षा सहायता पर रोक लगा दी थी. इसका कारण था पाकिस्तान का आतंकवादियों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई न करना और अमेरिकी विमानों का गलत उपयोग. पाकिस्तान के F-16 विमानों के भारत के खिलाफ उपयोग को लेकर अमेरिका में भी चिंता जताई गई थी, क्योंकि इन विमानों का उपयोग केवल आतंकवाद विरोधी अभियानों में किया जाना था.
बाइडन प्रशासन का बदलाव
2022 में बाइडन प्रशासन ने ट्रंप द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को हटा लिया और पाकिस्तान को 450 मिलियन डॉलर की राशि मंजूर की, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान के F-16 विमानों की देखरेख करना था. यह निर्णय एक महत्वपूर्ण कदम था, जिससे यह संकेत मिला कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ अपनी सुरक्षा साझेदारी को फिर से मजबूत करना चाहता है.
F-16 विमानों की निगरानी के लिए अमेरिका का 397 मिलियन डॉलर निवेश
अमेरिका ने पाकिस्तान के F-16 विमानों के उपयोग पर निगरानी रखने के लिए 397 मिलियन डॉलर की राशि निर्धारित की है. यह राशि पाकिस्तान में एक अमेरिकी-समर्थित कार्यक्रम के तहत उपयोग की जाएगी, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पाकिस्तान इन विमानों का उपयोग केवल आतंकवाद विरोधी अभियानों में करें, न कि भारत के खिलाफ.
अमेरिका और पाकिस्तान के सैन्य संबंधों में चीन का प्रभाव
पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते सैन्य और आर्थिक संबंधों को लेकर अमेरिका को चिंता है. पाकिस्तान की चीन के साथ बढ़ती निकटता अमेरिकी रक्षा उपकरणों की सुरक्षा और उद्देश्य पर सवाल उठाती है. इसके चलते, पाकिस्तान को यह अनुमति नहीं दी गई है कि वह अपने F-16 विमानों को उस सैन्य बेस पर रखे, जहां चीन और पाकिस्तान द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित JF-17 विमानों को रखा गया है.