Modi Jinping Meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात साल बाद शनिवार शाम को चीन के तियानजिन पहुंचे हैं. जहां वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं. इस दौरान उनकी सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक रविवार यानी आज को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होगी. इसे भारत-चीन संबंधों के लिए बड़ा पड़ाव माना जा रहा है.
मोदी और जिनपिंग की मुलाकात ऐसे समय पर हो रही है जब वैश्विक स्तर पर व्यापारिक अस्थिरता और नए गठबंधनों का दौर जारी है. अमेरिका की नई टैरिफ नीतियों ने भारत के साथ उसके रिश्तों को प्रभावित किया है. यही वजह है कि इस बैठक पर अमेरिका और पाकिस्तान दोनों की नजरें टिकी हुई हैं. सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा भी उठाएंगे, खासकर हाल ही में हुए पाहलगाम आतंकी हमले को लेकर. अगर चीन पाहलगाम हमले पर कोई बयान देता है तो यह पाकिस्तान के लिए यह बड़ा झटका साबित हो सकता है.
भारत और चीन के बीच लंबे समय से सीमा विवाद और तनाव चला आ रहा है लेकिन पिछले एक वर्ष से दोनों देशों ने बातचीत के जरिए कुछ सकारात्मक कदम उठाए हैं. जैसे भारतीय श्रद्धालुओं के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हुई है और चीन ने भारतीयों के लिए टूरिस्ट वीजा बहाल किया है. इस कूटनीतिक प्रयास को रिश्तों में सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
मोदी की इस यात्रा के दौरान व्यापार और आर्थिक सहयोग भी प्रमुख मुद्दा रहेगा. प्रधानमंत्री निष्पक्ष व्यापार की जरूरत पर बल देंगे. वे चीन से भारत की अहम जरूरतें जैसे दुर्लभ खनिज, उर्वरक और उपकरणों की आपूर्ति की प्रतिबद्धता चाहते हैं. हाल ही में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को भरोसा दिलाया था कि इन वस्तुओं पर लगाए गए निर्यात प्रतिबंध हटाए जाएंगे.
इसके साथ ही पहले ही दिन मोदी की मुलाकात म्यांमार के कार्यवाहक राष्ट्रपति और सेना प्रमुख मिन आंग हलाइंग से भी होने की भी संभावना है. यह इस साल दोनों नेताओं की दूसरी बैठक होगी. माना जा रहा है कि मोदी लोकतंत्र की बहाली और निष्पक्ष चुनाव पर जोर देंगे. भारत-चीन संबंधों में पांच साल पुराने सैन्य गतिरोध के बाद यह बैठक दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देने का अवसर मानी जा रही है. मोदी रणनीतिक दृष्टिकोण से इस रिश्ते को आगे बढ़ाना चाहते हैं. यही कारण है कि उनकी यह चीन यात्रा न केवल एशिया बल्कि पूरे वैश्विक राजनीति पर असर डालने वाली मानी जा रही है.