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पाकिस्तान में आया 4.7 का तीव्रता का भूकंप, तीन दिन में लगातार तीसरी बार हिली धरती

Pakistan Earthquakes: भूकंप के झटके पाकिस्तान के कई इलाकों में महसूस किए गए, जिससे लोगों में हल्का दहशत का माहौल देखा गया. हालांकि, फिलहाल किसी जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है.

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Kanhaiya Kumar Jha

Pakistan Earthquakes: राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार सोमवार को पाकिस्तान में एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.7 मापी गई. यह झटका भारतीय समयानुसार सुबह 11:12 बजे दर्ज किया गया. भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था.

एनसीएस द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक भूकंप का केंद्र 30.51° उत्तर अक्षांश और 70.41° पूर्व देशांतर पर स्थित था. यह इलाका भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है. भूकंप के झटके पाकिस्तान के कई इलाकों में महसूस किए गए, जिससे लोगों में हल्का दहशत का माहौल देखा गया. हालांकि, फिलहाल किसी जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है.

उथले भूकंप गहरे भूकंपों की तुलना में कहीं अधिक जोखिम पैदा कर सकते हैं

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के उथले भूकंप गहरे भूकंपों की तुलना में कहीं अधिक जोखिम पैदा कर सकते हैं. हालांकि अब तक किसी बड़े नुकसान या हताहतों की जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन स्थानीय प्रशासन सतर्क है और स्थिति पर नज़र रखे हुए है.

अत्याधिक संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है पाकिस्तान

पाकिस्तान भूगर्भीय रूप से अत्याधिक संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है. देश के कई हिस्से सक्रिय फॉल्ट लाइनों के ऊपर बसे हैं. बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और गिलगित-बाल्टिस्तान प्रांत यूरेशियन प्लेट के दक्षिणी किनारे पर स्थित हैं, जबकि सिंध और पंजाब प्रांत इंडियन प्लेट के उत्तर-पश्चिमी किनारे पर हैं. इन दोनों विवर्तनिक प्लेटों के टकराव से यह इलाका भूकंपों के लिए विशेष रूप से संवेदनशील बना रहता है.

भूगर्भीय विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार आ रहे मध्यम तीव्रता के झटके भविष्य में बड़े भूकंप की संभावना को नकारते नहीं हैं. इसलिए प्रशासनिक एजेंसियां स्थिति की लगातार निगरानी कर रही हैं और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है.

पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान ने कई विनाशकारी भूकंपों का सामना किया है. विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र में बेहतर भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली और मजबूत बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है, ताकि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को न्यूनतम किया जा सके.