menu-icon
India Daily

चीन ने ट्रंप के टैरिफ का दिया जवाब, सितंबर में अमेरिकी सोयाबीन आयात पूरी तरह रोका

US soybean: अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापारिक तनाव ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है. चीन ने सितंबर माह में अमेरिका से एक भी टन सोयाबीन आयात नहीं किया, जो नवंबर 2018 के बाद पहली बार हुआ है जब अमेरिकी सोयाबीन की शिपमेंट शून्य पर पहुंची.

Anubhaw Mani Tripathi
चीन ने ट्रंप के टैरिफ का दिया जवाब, सितंबर में अमेरिकी सोयाबीन आयात पूरी तरह रोका
Courtesy: x/ @ani_digital

US soybean: अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापारिक तनाव ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है. चीन ने सितंबर माह में अमेरिका से एक भी टन सोयाबीन आयात नहीं किया, जो नवंबर 2018 के बाद पहली बार हुआ है जब अमेरिकी सोयाबीन की शिपमेंट शून्य पर पहुंची. वहीं दूसरी ओर, दक्षिण अमेरिकी देशों ब्राज़ील और अर्जेंटीना से चीन के सोयाबीन आयात में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

चीन के सीमा शुल्क प्रशासन (General Administration of Customs) के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में अमेरिका से सोयाबीन आयात शून्य रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 17 लाख मीट्रिक टन था. इसके विपरीत, ब्राज़ील से आयात में 29.9% की वृद्धि होकर यह 1.096 करोड़ टन तक पहुंच गया, जो कुल आयात का लगभग 85.2% हिस्सा है. अर्जेंटीना से आयात में भी 91.5% की तेज़ बढ़ोतरी हुई, जो 11.7 लाख टन रहा और कुल आयात का लगभग 9% हिस्सा बना.

फ्यूचर्स के विश्लेषक वान चेंगझी

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी सोयाबीन आयात में यह गिरावट सीधे तौर पर चीन द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ का परिणाम है. कैपिटल जिंगडू फ्यूचर्स के विश्लेषक वान चेंगझी के अनुसार, “यह मुख्य रूप से टैरिफ का असर है. सामान्य वर्षों में पुराने स्टॉक (old-crop beans) से कुछ मात्रा में आयात होता रहता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ.”

सितंबर में चीन का कुल सोयाबीन आयात 1.287 करोड़ मीट्रिक टन रहा, जो अब तक का दूसरा सबसे बड़ा मासिक आयात स्तर है. हालांकि, चीन ने इस वर्ष की अमेरिकी फसल से अब तक कोई नया सौदा नहीं किया है. नवंबर तक के लिए खरीदारों ने अधिकांश शिपमेंट्स ब्राज़ील और अर्जेंटीना से बुक कर ली हैं, खासकर अर्जेंटीना की अस्थायी टैक्स छुट के चलते.

आपूर्ति संकट का जोखिम

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले महीनों में चीन-अमेरिका के बीच कोई व्यापार समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिकी किसानों को अरबों डॉलर के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है. वहीं चीन को भी अगले वर्ष फरवरी से अप्रैल के बीच आपूर्ति संकट का जोखिम रहेगा, क्योंकि तब तक ब्राज़ील की नई फसलें बाजार में नहीं आएंगी. बीजिंग स्थित एगरेडार कंसल्टिंग के संस्थापक जॉनी जियांग के अनुसार, “यदि समझौता नहीं हुआ तो चीन को फरवरी-अप्रैल के बीच सोयाबीन की कमी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि पुराना स्टॉक सीमित है.”

सोयाबीन व्यापार को लेकर एक समझौता

जनवरी से सितंबर 2025 के बीच चीन ने ब्राज़ील से 6.37 करोड़ टन और अर्जेंटीना से 29 लाख टन सोयाबीन आयात किया है. वहीं अब तक अमेरिकी सोयाबीन का कुल आयात 1.68 करोड़ टन रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15.5% अधिक है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि उन्हें भरोसा है कि जल्द ही सोयाबीन व्यापार को लेकर एक समझौता हो जाएगा. हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक अगर यह वार्ता नाकाम रही, तो इसका असर न केवल किसानों पर बल्कि वैश्विक तेल बीज बाजार पर भी गहरा पड़ेगा.