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India Daily

'युद्ध के लिए तैयार है हमारी सेना', ईरान की अमेरिका को खुली चेतावनी; खाड़ी में फिर मंडराए युद्ध के बादल

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव फिर से चरम पर पहुंच गया है. ईरान ने युद्ध दोबारा शुरू होने की चेतावनी दी है. वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को ठुकराते हुए उस पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं.

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'युद्ध के लिए तैयार है हमारी सेना', ईरान की अमेरिका को खुली चेतावनी; खाड़ी में फिर मंडराए युद्ध के बादल
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है. ईरान की सशस्त्र सेनाओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अमेरिका और इजरायल के साथ दोबारा युद्ध छिड़ना अब लगभग तय है. ईरान का आरोप है कि वाशिंगटन समझौतों का पालन करने में विफल रहा है. ईरान के सैन्य मुख्यालय के उप प्रमुख मोहम्मद जाफर असदी के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों के बयान कूटनीति के प्रति उनकी गंभीरता की कमी को दर्शाते हैं. फिलहाल पिछले तीन हफ्तों से जारी संघर्ष विराम अब बेहद नाजुक मोड़ पर है.

ईरान ने अपनी पूरी सेना को हाई अलर्ट पर रखा है और किसी भी स्थिति से निपटने की तैयारी की है. मोहम्मद जाफर असदी का दावा है कि अमेरिका केवल तेल की कीमतों में गिरावट को रोकने और अपनी बनाई हुई परिस्थितियों से दूरी बनाने के लिए मीडिया का सहारा ले रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान किसी भी सैन्य उकसावे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है. इसे क्षेत्र में अमेरिका के संभावित एक्शन के खिलाफ एक सख्त चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है.

डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख, ठुकराया ईरान का प्रस्ताव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए भेजे गए शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है. ट्रंप ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा कि वह ईरान के इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं. हालांकि उन्होंने अपने विरोध का कोई विशिष्ट कारण नहीं बताया, लेकिन उन्होंने ईरानी नेतृत्व को पूरी तरह बिखरा हुआ और उलझा हुआ करार दिया. ट्रंप के इस कड़े फैसले ने कूटनीतिक रास्तों को लगभग बंद कर दिया है जिससे तनाव और बढ़ गया है.

होर्मुज जलडमरूमध्य में नया 'टोल' विवाद 

अमेरिका ने वैश्विक शिपिंग कंपनियों को कड़ी चेतावनी जारी की है कि यदि उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने के लिए ईरान को किसी भी प्रकार का भुगतान किया, तो उन पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. अमेरिकी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) के अनुसार यह भुगतान नकद, डिजिटल संपत्ति या दान के रूप में भी हो सकता है. ईरान ने फरवरी में इस रणनीतिक मार्ग को बंद कर दिया था. जिसके बाद उसने जहाजों से अपनी सीमा के करीब से गुजरने के लिए शुल्क लेना शुरू किया है.

समुद्री नाकेबंदी और गहराता आर्थिक संकट 

अमेरिका ने ईरान की इस वसूली का जवाब 13 अप्रैल को अपनी नौसैनिक नाकेबंदी से दिया था. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार अब तक 45 वाणिज्यिक जहाजों को नाकेबंदी के कारण वापस लौटने का आदेश दिया जा चुका है. इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ईरानी तेल राजस्व को पूरी तरह से काटना है. जिससे ईरान की पहले से ही संघर्ष कर रही अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगा है. होर्मुज जलमार्ग से दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवा हिस्सा गुजरता है, जिससे यह संकट वैश्विक बन गया है.