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India Daily

सिर्फ कोहिनूर ही नहीं...अभी भी हैं ब्रिटेन के पास हैं भारत की ये कीमती चीजें, ममदानी की मांग के बाद फिर गरमाया विवाद

न्यूयॉर्क मेयर जोहरान ममदानी की मांग के बाद कोहिनूर की वापसी का मुद्दा फिर चर्चा में है. चलिए जानते हैं कोहिनूर के अलावा और कौन-कौन सी भारतीय धरोहरें अब भी ब्रिटेन में हैं.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
सिर्फ कोहिनूर ही नहीं...अभी भी हैं ब्रिटेन के पास हैं भारत की ये कीमती चीजें, ममदानी की मांग के बाद फिर गरमाया विवाद
Courtesy: @BlackwoodBrief and @saraanwar45 x account

नई दिल्ली: कोहिनूर हीरे की भारत वापसी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है. इस बार यह बहस न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी के बयान के बाद तेज हुई है. ममदानी ने कहा कि अगर उन्हें मौका मिला तो वह ब्रिटेन के किंग से भारत का कोहिनूर हीरा लौटाने की मांग करेंगे. फिलहाल कोहिनूर टॉवर ऑफ लंदन के ज्वेल हाउस में रखा हुआ है.

कोहिनूर सिर्फ एक हीरा नहीं, बल्कि भारत के इतिहास का बड़ा प्रतीक माना जाता है. यह कभी मुगल शासकों के पास था. बाद में नादिर शाह भारत से इसे अपने साथ ले गया. उसकी मौत के बाद यह हीरा फिर पंजाब पहुंचा और महाराजा रणजीत सिंह के पास आ गया. उनके निधन के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने पंजाब पर कब्जा मजबूत किया और कोहिनूर को ब्रिटेन भेज दिया. बाद में यह ब्रिटिश शाही ताज का हिस्सा बन गया.

भारत की कौन-कौन सी धरोहर वहां है?

ब्रिटेन के पास सिर्फ कोहिनूर ही नहीं, भारत की कई अन्य ऐतिहासिक धरोहरें भी मौजूद हैं. टीपू सुल्तान की तलवार, उनकी अंगूठी और मशहूर टाइगर मॉडल आज भी ब्रिटेन के संग्रहालयों में रखे हैं. यह टाइगर मॉडल एक अंग्रेज सैनिक पर हमला करते बाघ को दिखाता है और टीपू सुल्तान के संघर्ष का प्रतीक माना जाता है.

सुलतानगंज बुद्धा 

इसके अलावा सुलतानगंज बुद्धा भी ब्रिटेन में मौजूद है. बिहार से मिली यह विशाल कांस्य प्रतिमा फिलहाल बरमिंघम म्यूजियम एवं आर्ट गैलरी में रखी गई है.

अमरावती स्तूप से जुड़ी कई मूर्तियां 

अमरावती स्तूप से जुड़ी कई मूर्तियां भी ब्रिटेन पहुंच चुकी हैं. इन मूर्तियों को औपनिवेशिक काल में भारत से ले जाया गया था. सरस्वती और अन्य धार्मिक मूर्तियां भी ब्रिटिश संग्रहालयों में रखी गई हैं.

कीमती वाइन कप

शाहजहां से जुड़ा कीमती वाइन कप और कई दुर्लभ संस्कृत व फारसी पांडुलिपियां भी ब्रिटेन के पास हैं. भारत लंबे समय से इन धरोहरों की वापसी की मांग करता रहा है. सरकार और इतिहासकार इसे सांस्कृतिक न्याय का मुद्दा मानते हैं. वहीं ब्रिटेन का कहना है कि ये अब वैश्विक विरासत हैं.