नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य पर नाकाबंदी अब भी जारी है. इसके चलते ईरान के 53 मिलियन बैरल कच्चे तेल के 31 टैंकर ओमान की खाड़ी में खड़े हैं. इससे तेहरान को 4.8 बिलियन डॉलर के ऑयल रेवन्यू का नुकसान हुआ है. एक रिपोर्ट के अनुसार, इस तरह से तेहरान को काफी ज्यादा आर्थिक नुकसान हुआ है. अगर ऐसा ही चलता रहा तो यह नुकसान और भी ज्यादा बढ़ सकता है. पेंटागन अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप प्रशासन ने 40 से ज्यादा ऐसे जहाजों को रोक दिया है जो ईरानी तेल और अन्य माल लेकर वहां से गुजरने की कोशिश कर रहे हैं.
ईरान नए टैंकरों में तेल भरने में असमर्थ हो गया था, जिसके चलते तेहरान ने पुराने जहाजों को तैरते हुए गोदामों के तौर पर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. हालांकि, यह एक टेम्पररी सॉल्यूसन है, जो संकट को टाल जरूर रहा है, लेकिन परमानेंट सॉल्यूशन नहीं करता है. इसे लेकर विश्लेषकों का अनुमान है कि देश का स्टोरेज पूरी तरह से खत्म होने में अभी कुछ समय लग सकता है. अगर ऐसा होता है तो तेल के कुओं को बंद करना करना पड़ सकता है.
इस समस्या के चलते कुछ ईरानी टैंकरों ने वैकल्पिक रास्ते ढूंढ लिए हैं, जो थोड़े महंगे हैं. हालांकि, ओमान की खाड़ी में अमेरिकी हस्तक्षेप का जोखिम उठाने से बेहतर हैं. इनमें से कुछ जहाजों ने पाकिस्तान और भारत के तटों से सटकर लंबे और ज्यादा खर्चीले रास्ते अपनाएं हैं, जिससे वो मलक्का जलडमरूमध्य तक पहुंच सकें.
टैंकर ट्रैकिंग फर्म टैंकर ट्रैकर्स के को-फाउंडर समीर मदानी ने ईरान के एक बड़े टैंकर ह्यूज का भी उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि किस तरह से नाकाबंदी से बचा जा सकता है. मदानी ने यह भी कहा कि जो ईरानी टैंकर अभी फंसे हुए हैं, वो शायदर आगे चलकर एक साथ मिलकर वहां से निकलने की कोशिश कर सकते हैं. ऐसा तब होगा जब पाकिस्तान की सीमा के पास पर्याप्त भंडारण क्षमता तैयार हो जाएगी या फिर जब उनके साथ ऐसी संभाना बनेगी कि वो एक ही रात में बड़ी संख्या में वहां से निकल पाएं.