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India Daily

पाकिस्तानी सेना पर आसमान से हमले की तैयारी, BLA की पहली एयर यूनिट ने जारी की फुटेज; जानें कैसे कंगालिस्तान की उड़ाएगी नींद

बलूच लिबरेशन आर्मी ने बलूचिस्तान में अपनी पहली एयर और ड्रोन यूनिट बनाने का दावा किया है. फुटेज में दो BLA सैनिक पहाड़ी इलाके में ड्रोन की टेस्टिंग करते हुए दिख रहे हैं, जबकि आगे के फुटेज में ग्वादर में ड्रोन की एक्टिविटी दिखाने का दावा किया गया है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
पाकिस्तानी सेना पर आसमान से हमले की तैयारी, BLA की पहली एयर यूनिट ने जारी की फुटेज; जानें कैसे कंगालिस्तान की उड़ाएगी नींद
Courtesy: @TahaSSiddiqui x account

नई दिल्ली: आने वाले दिनों में पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं. बलूचिस्तान में एक्टिव अलगाववादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी यानी BLA ने ऑफिशियली अपनी पहली मॉडर्न एयर और ड्रोन वॉरफेयर यूनिट, 'काजी एयरो हाइव रेंजर्स' यानी QAHR बनाने का ऐलान किया है, जिससे लड़ाई के मैदान में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ेगा.

संगठन के बयान के मुताबिक यह यूनिट एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, ड्रोन ऑपरेशन और एरियल सर्विलांस कैपेबिलिटी पर फोकस करती है. BLA ने दावा किया कि इस यूनिट का कॉन्सेप्ट सीनियर कमांडर अब्दुल बासित ने डेवलप किया था, जिन्होंने संगठन के अंदर टेक्नोलॉजिकल रिसर्च और मॉडर्न वॉरफेयर स्ट्रेटेजी को प्रायोरिटी दी थी.

ग्रुप ने क्या किया दावा?

ग्रुप का दावा है कि QAHR ने ग्वादर में अपने हालिया बड़े हमले के दौरान पहली बार ड्रोन का इस्तेमाल किया, जिसे 'ऑपरेशन हेरोफ 2.0' कहा गया. संगठन के मुताबिक, ऑपरेशन में मिलिट्री जगहों, पोर्ट फैसिलिटी और कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट किया गया था. हालांकि, इन दावों को इंडिपेंडेंटली वेरिफाई नहीं किया जा सका.

वीडियो में क्या दिखाया गया?

यूनिट की घोषणा के साथ, BLA ने लगभग दो मिनट का एक वीडियो और कई तस्वीरें जारी कीं. वीडियो में दो हथियारबंद सदस्य पहाड़ी इलाके में ड्रोन की टेस्टिंग करते हुए दिख रहे हैं. फिर फुटेज में ग्वादर के ऊपर कथित तौर पर उड़ते हुए ड्रोन का फुटेज दिखाया गया है, जो 'ऑपरेशन हीरोफ 2.0' से जुड़ा है.

अगर यह सच है तो क्या होगा?

विश्लेषकों का मानना ​​है कि अगर यह सच है, तो यह दावा इस इलाके में मिलिटेंट ग्रुप्स की टैक्टिक्स में टेक्नोलॉजिकल बदलाव का संकेत दे सकता है. ड्रोन-बेस्ड हमले सिक्योरिटी एजेंसियों के लिए एक नई चुनौती बन सकते हैं, खासकर उन इलाकों में जहां पहले पारंपरिक गुरिल्ला हमले होते थे. इस दावे पर पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से तुरंत कोई डिटेल्ड ऑफिशियल जवाब नहीं आया.