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India Daily

बांग्लादेश में BNP की बड़ी जीत! क्या तारिक रहमान होंगे अगले प्रधानमंत्री? पार्टी का प्लान-B भी तैयार

बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में बीएनपी ने भारी जीत हासिल की, 158 सीटें जीतीं. तारिक रहमान दोनों सीटों से जीते और प्रधानमंत्री बनने की प्रबल दावेदारी में हैं. पार्टी ने प्लान-बी के तौर पर मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को तैयार रखा है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
बांग्लादेश में BNP की बड़ी जीत! क्या तारिक रहमान होंगे अगले प्रधानमंत्री? पार्टी का प्लान-B भी तैयार
Courtesy: @InfoR00M

नई दिल्ली: बांग्लादेश में गुरुवार को हुए ऐतिहासिक चुनाव के नतीजे देश की राजनीति को नई दिशा दे रहे हैं. 2024 के जेन-Z आंदोलन से शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद पहली बार मतदान हुआ. बीएनपी ने जमात-ए-इस्लामी पर स्पष्ट बढ़त बनाई है. अनौपचारिक गिनती में बीएनपी ने 158 सीटें जीत ली हैं. तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद लौटे और अब प्रधानमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार हैं. मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार का 18 महीने का दौर खत्म होने वाला है. पार्टी ने प्लान-बी भी तैयार रखा है.

बीएनपी की शानदार बढ़त

शुक्रवार सुबह तक 299 में से 204 सीटों की गिनती पूरी हुई. स्थानीय मीडिया के अनुसार बीएनपी 158 सीटों पर विजयी रही, जमात को 41 और अन्य दलों को 5 सीटें मिलीं. तारिक रहमान ने ढाका और बोगुरा दोनों निर्वाचन क्षेत्रों से जीत दर्ज की. चुनाव आयोग अभी आधिकारिक घोषणा नहीं कर सका है, लेकिन परिणाम बीएनपी के पक्ष में साफ हैं. 

तारिक रहमान का बड़ा कमबैक

खालिदा जिया के बड़े बेटे तारिक रहमान दिसंबर 2025 में 17 साल के निर्वासन से लौटे. उनकी मां के कार्यकाल में उन्हें ‘डार्क प्रिंस’ कहा जाता था. कई लोग मानते थे कि वे ‘शैडो पीएमओ’ चला रहे थे. बीएनपी ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि सत्ता में आने पर तारिक ही प्रधानमंत्री बनेंगे.  

प्लान-बी में फखरुल इस्लाम आलमगीर

बीएनपी ने सावधानी बरतते हुए प्लान-बी भी तैयार रखा है. अगर कानूनी अड़चनें या जुलाई चार्टर के सुधार तारिक रहमान के लिए रुकावट बनें, तो पार्टी के वरिष्ठ महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर प्रधानमंत्री पद संभाल सकते हैं. फखरुल को पार्टी में स्थिरता और संतुलन लाने वाला विश्वसनीय नेता माना जाता है.  

जुलाई चार्टर और चुनाव का संदर्भ

चुनाव के साथ 84 सूत्रीय जुलाई नेशनल चार्टर पर जनमत संग्रह भी हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री कार्यकाल सीमित करने, संसद में ऊपरी सदन बनाने जैसे सुधार शामिल हैं. अवामी लीग के बिना यह मुकाबला बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच सीधा रहा. बीएनपी की जीत से बांग्लादेश में नया राजनीतिक अध्याय शुरू होने जा रहा है.