पश्चिम बंगाल के गुस्कारा से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है. कलिता मांझी, जो कभी बर्तन धोकर महीने के सिर्फ 4500 रुपये कमाती थीं, आज भाजपा की विधायक बनकर पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गई हैं. उनकी इस सफलता ने साबित कर दिया कि मेहनत और हौसले के आगे कोई बाधा नहीं टिकती.
कलिता मांझी एक साधारण महिला हैं. 2006 में प्लंबर से शादी के बाद उन्होंने गुस्कारा में दो घरों में काम करना शुरू किया. सुबह से शाम तक घरेलू काम, बर्तन मांजना, कपड़े धोना और बच्चों की देखभाल के बीच उनका पूरा दिन बीतता था. परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ आर्थिक तंगी भी लगातार सताती रही. लेकिन कलिता ने हार नहीं मानीं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण उन्हें बहुत प्रेरित करते थे. धीरे-धीरे वे भाजपा की रैलियों और कार्यक्रमों में शामिल होने लगीं. घर-गृहस्थी संभालते हुए भी वे पार्टी के लिए सक्रिय रहतीं. लोगों से जुड़तीं, उनकी समस्याएं सुनतीं और अपनी बात रखतीं. धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई.
2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कलिता मांझी ने गुस्कारा सीट से शानदार जीत दर्ज की. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी श्यामा प्रसन्ना लोहार को 12,535 वोटों से हराया. कलिता को कुल 1,07,692 वोट मिले. यह जीत सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि उन लाखों गरीब महिलाओं की जीत है जो रोजमर्रा की जिंदगी में संघर्ष कर रही हैं.
चुनाव जीतने के बाद भी कलिता का व्यवहार बिल्कुल सामान्य रहा. देर रात घर पहुंचीं तो कोई भव्य स्वागत या पार्टी नहीं हुई. थकी-हारी कलिता ने सास द्वारा बनाए साधारण आलू-पटोल और झोल का खाना खाया. अगले दिन सुबह वे फिर से अपने रोजमर्रा के कामों में लग गईं – कपड़े धोने और घर के काम निपटाने में. कलिता कहती हैं कि अब वे गरीबों, खासकर महिलाओं के लिए काम करना चाहती हैं. उनकी अपनी जिंदगी संघर्ष की रही है, इसलिए वे समझती हैं कि गरीब परिवारों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है.