Anant Shastra Missile: भारतीय सेना ने स्वदेशीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘अनंत शस्त्र’ एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की खरीद का रास्ता साफ कर दिया है. सेना ने इस परियोजना के लिए 30 हजार करोड़ रुपये का टेंडर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) को जारी किया है. यह सिस्टम रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित किया गया है और पहले इसे क्विक रिएक्शन सरफेस-टू-एयर मिसाइल (QRSAM) सिस्टम के नाम से जाना जाता था.
सूत्रों के अनुसार, सेना पांच से छह रेजीमेंट ‘अनंत शस्त्र’ को अपनी एयर डिफेंस क्षमता में शामिल करेगी. यह प्रणाली पाकिस्तान और चीन से लगी सीमाओं पर तैनात की जाएगी. इन मिसाइलों की रेंज लगभग 30 किलोमीटर है और ये चलते-फिरते लक्ष्यों की खोज और ट्रैकिंग करने में सक्षम हैं. जरूरत पड़ने पर ये छोटी रुकावट के दौरान भी फायर कर सकती हैं.
Indian Army issues Rs 30,000 Cr tender to BEL for buying 'Anant Shastra' air defence missile systems
Read @ANI story | https://t.co/YfeavuxfcX#IndianArmy #BEL #AnantShastra pic.twitter.com/TftWRmowA6— ANI Digital (@ani_digital) September 27, 2025Also Read
इस परियोजना से सेना की एयर डिफेंस को नई ताकत मिलेगी. हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के ड्रोन हमलों को रोकने में सेना की एयर डिफेंस इकाइयों ने अहम भूमिका निभाई थी. उस समय L-70 और Zu-23 एयर डिफेंस गनों के साथ-साथ आकाश और MRSAM मिसाइलों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था. भारतीय वायुसेना के स्पाइडर और एस-400 सिस्टम भी ऑपरेशन में शामिल थे.
रक्षा अधिग्रहण परिषद ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस परियोजना को मंजूरी दी थी. अब सेना के पास MRSAM, आकाश समेत कई छोटे-बड़े एयर डिफेंस सिस्टम पहले से मौजूद हैं, जिनके साथ ‘अनंत शस्त्र’ जुड़कर रक्षा कवच को और मजबूत करेगा.
‘अनंत शस्त्र’ का परीक्षण दिन और रात दोनों परिस्थितियों में किया जा चुका है. सेना को जल्द ही नए रडार, बहुत कम दूरी पर काम करने वाले एयर डिफेंस सिस्टम, जैमर और लेजर आधारित हथियार भी मिलने वाले हैं, ताकि पाकिस्तान और चीन से आने वाले ड्रोन खतरों को रोका जा सके. सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी लगातार स्वदेशीकरण पर जोर दे रहे हैं. आने वाले समय में ‘अनंत शस्त्र’ के अलावा जोरावर लाइट टैंक और अन्य एयर डिफेंस सिस्टम भी सेना का हिस्सा बनने वाले हैं. यह कदम भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है.