गुजरात: गुजरात की राजधानी गांधीनगर में टाइफाइड के मामलों में आई अचानक तेजी ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है. बीते 72 घंटों में 100 से अधिक लोग जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं, सिविल अस्पताल में भर्ती किए गए हैं. शुरुआती जांच में इस 'मेडिकल इमरजेंसी' का मुख्य कारण दूषित पानी की सप्लाई को माना जा रहा है.
हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुद गांधीनगर कलेक्टर से फोन पर कई बार बात की और स्थिति की समीक्षा की. वहीं, उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने शनिवार को अस्पताल का दौरा कर मरीजों का हाल जाना. उन्होंने बताया कि मरीजों के बेहतर इलाज के लिए 22 विशेषज्ञ डॉक्टरों की विशेष टीम तैनात की गई है.
सिविल अस्पताल की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. मीता पारिख के अनुसार, संक्रमण का केंद्र मुख्य रूप से सेक्टर-24, 25, 26 और 28. इन क्षेत्रों से लिए गए पीने के पानी के नमूनों की शुरुआती जांच में पानी असुरक्षित पाया गया है. पाइपलाइन में लीकेज या सीवेज मिक्सिंग की आशंका जताई जा रही है.
मध्य प्रदेश और गुजरात में पीने के पानी ने मेडिकल इमरजेंसी जैसी स्थिति पैदा कर दी है. इंदौर जो देश का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता है, वहां के भागीरथपुरा इलाके में सीवेज का पानी पीने की पाइपलाइन में मिलने से डायरिया और हैजा का जबरदस्त प्रकोप फैला. वहीं दूसरी तरफ गुजरात की राजधानी गांधीनगर के कई सेक्टरों में स्मार्ट सिटी की नई पाइपलाइनों में लीकेज के कारण टाईफॉइड का कहर टूटा है, जिससे 100 से अधिक बच्चे और बुजुर्ग बीमार होकर अस्पताल पहुंच चुके हैं.
नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में डोर-टू-डोर सर्वे शुरू कर दिया है. प्रशासन ने लोगों के लिए तत्काल एडवाइजरी जारी की है:
पानी उबालकर पिएं: पाइपलाइन के पानी को सीधे इस्तेमाल न करें.
क्लोरीन टैबलेट: निगम द्वारा बांटी जा रही क्लोरीन की गोलियों का पानी की टंकियों में इस्तेमाल करें.
ताजा भोजन: बाहर के खाने से बचें और घर का बना ताजा भोजन ही लें.