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India Daily

उमर खालिद समेत छह आरोपियों की जमानत पर 5 जनवरी को फैसला सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट, इंटरनेशनल बन चुका है ये मुद्दा

पूर्व जेएनयू छात्र उमर खालिद इस मामले में सितंबर 2020 से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं. उन पर आरोप है कि वे दिल्ली दंगों की कथित साजिश में शामिल थे.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
उमर खालिद समेत छह आरोपियों की जमानत पर 5 जनवरी को फैसला सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट, इंटरनेशनल बन चुका है ये मुद्दा
Courtesy: Umar Khalid

साल 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े बड़े साजिश मामले में सुप्रीम कोर्ट सोमवार, 5 जनवरी 2026 को अहम फैसला सुनाने जा रहा है. यह फैसला छह आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर होगा, जिनमें उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शादाब अहमद और मोहम्मद सलीम खान शामिल हैं. सभी पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (UAPA) के तहत गंभीर आरोप लगे हैं.

तिहाड़ जेल में बंद हैं उमर खालिद

पूर्व जेएनयू छात्र उमर खालिद इस मामले में सितंबर 2020 से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं. उन पर आरोप है कि वे दिल्ली दंगों की कथित साजिश में शामिल थे. इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. मामला लंबे समय से कोर्ट में चल रहा है और जमानत को लेकर लगातार बहस हो रही है.

न्यूयॉर्क के मेयर का नोट चर्चा में

फैसले से पहले उमर खालिद को भेजा गया एक हाथों से लिखा गया नोट चर्चा का विषय बन गया है. यह नोट न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने लिखा है. उन्होंने अपने संदेश में उमर खालिद को हिम्मत रखने की बात कही और उनके माता-पिता से मुलाकात का जिक्र किया. यह नोट सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद सुर्खियों में आ गया.

कैसे लिखा गया यह नोट

उमर खालिद की पार्टनर बानो ज्योत्सना लाहिरी के अनुसार, दिसंबर 2025 में उमर के माता-पिता अमेरिका गए थे. वहीं उनकी मुलाकात मेयर जोहरान ममदानी से हुई थी. उसी दौरान ममदानी ने यह नोट लिखा. यह यात्रा उनकी छोटी बेटी की शादी से पहले हुई थी.

अमेरिकी सांसदों ने भी जताई चिंता

उमर खालिद की लंबी हिरासत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठ रहे हैं. अमेरिका के आठ सांसदों ने भारत में अमेरिकी राजदूत को पत्र लिखकर उमर खालिद के लिए निष्पक्ष और समयबद्ध सुनवाई की मांग की है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकार संधियों का हवाला देते हुए चिंता जताई है.

अंतरिम जमानत का भी मिला लाभ

पिछले महीने दिल्ली की एक अदालत ने उमर खालिद को अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए सीमित समय की अंतरिम जमानत दी थी. इस दौरान उन्हें सख्त शर्तों का पालन करना पड़ा और वे घर से बाहर नहीं जा सके.

अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर

अब देश और विदेश, दोनों जगहों पर नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है. यह फैसला न सिर्फ आरोपियों के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि इस संवेदनशील मामले की आगे की दिशा भी तय करेगा.